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सिंगरौली: स्कूल से लौट रही नाबालिग को घसीटकर जंगल ले गया मनचला, अब पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल; परिजनों और TI के बयानों में फंसा पेंच

सिंगरौली (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र से दिनदहाड़े एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और अपहरण ...

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| सतना टाइम्स

सिंगरौली (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र से दिनदहाड़े एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और अपहरण की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। जहाँ पीड़िता और उसके पिता न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं थाना प्रभारी का दावा है कि परिजन केस ही नहीं चाहते।

attempt to molest a minor in broad daylight

क्या है पूरा मामला?

घटना 24 दिसंबर की बताई जा रही है। पीड़िता के अनुसार, वह स्कूल से घर लौट रही थी, तभी रास्ते में एक लड़के ने उसे रोका और जबरन घसीटकर गुलमेंहदी के जंगल की ओर ले जाने लगा।

  • साहसी प्रत्यक्षदर्शी: लड़की की “जान बचाओ” की चीखें सुनकर पास ही मौजूद संतराम केवट मौके पर दौड़े। संतराम को आता देख आरोपी ने लड़की को छोड़ दिया। इसके बाद संतराम और एक अन्य ग्रामीण तेजनी केवट ने घेराबंदी कर आरोपी लड़के को पकड़ लिया।

  • पीड़िता का बयान: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें डरी-सहमी नाबालिग खुद के साथ हुई पूरी घटना बयां कर रही है।

पुलिस पर गंभीर आरोप: “सही आवेदन टाइप नहीं किया”

लड़की के पिता का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने कंप्यूटर पर आवेदन तो टाइप किया, लेकिन उसमें घटना का सही उल्लेख नहीं किया। पिता का कहना है कि पुलिस मामले को हल्का करने की कोशिश कर रही है और उचित कार्रवाई नहीं कर रही है।

थाना प्रभारी की सफाई: “परिजन नहीं चाहते कार्रवाई”

इधर, चितरंगी थाना प्रभारी सुधेश तिवारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि:

“लड़की के घरवालों ने खुद लिखित में दिया है कि वे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। हमारे पास परिजनों के इस बयान का वीडियो सबूत भी मौजूद है।”

उलझे हुए सवाल: विरोधाभास या दबाव?

इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं जो पुलिस की थ्योरी पर संदेह पैदा करते हैं:

  1. यदि परिजन कार्रवाई नहीं चाहते थे, तो वे थाने आवेदन देने क्यों गए?

  2. थाने में पदस्थ एक महिला अधिकारी ने मीडिया को बताया कि आरोपी भी नाबालिग है और उसे रीवा (सुधार गृह) भेजा जाएगा, तो फिर थाना प्रभारी “नो एक्शन” की बात क्यों कर रहे हैं?

  3. क्या किसी दबाव या लोक-लाज के डर से परिजनों से “कार्रवाई नहीं चाहने” का पत्र लिखवाया गया है?

फिलहाल, इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक तरफ रक्षक (पुलिस) का दावा है और दूसरी तरफ पीड़िता का वीडियो और पिता के आरोप। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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