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सतना में आवारा कुत्तों का ‘आतंक’: 10 दिन में 1104 लोगों को लगा रेबीज का टीका; हर रोज 37 नए शिकार

सतना (मध्य प्रदेश):सतना जिले में इन दिनों आवारा कुत्ते बेकाबू हो गए हैं। सड़कों, गलियों और पार्कों में कुत्तों के झुंड ने ...

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| सतना टाइम्स

सतना (मध्य प्रदेश):सतना जिले में इन दिनों आवारा कुत्ते बेकाबू हो गए हैं। सड़कों, गलियों और पार्कों में कुत्तों के झुंड ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जिला अस्पताल के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 के बीच 1104 एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के डोज लगाए जा चुके हैं। यानी अस्पताल में हर दिन औसतन 110 से अधिक लोग वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।stray dogs

डराने वाले आंकड़े: नए मरीजों की संख्या में उछाल

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. शरद दुबे द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

  • नए मामले: पिछले 10 दिनों में 370 नए मरीज सामने आए हैं (जिन्हें पहला डोज लगा)।

  • दैनिक औसत: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर दिन औसतन 37 लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं।

  • वास्तविक स्थिति: यदि निजी अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़ों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या प्रतिदिन 150 के पार जा सकती है।

स्टॉक की स्थिति: 26,000 वैक्सीन उपलब्ध

मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने राहत की खबर दी है:

  • पर्याप्त भंडार: जिला अस्पताल और CMHO स्टोर को मिलाकर कुल 26,000 डोज उपलब्ध हैं।

  • निःशुल्क सुविधा: सरकारी अस्पतालों में यह वैक्सीन पूरी तरह मुफ्त लगाई जा रही है।

  • विशेष व्यवस्था: भीड़ को देखते हुए अस्पताल में अलग से इंजेक्शन कक्ष और विशेष काउंटर बनाए गए हैं।

डॉक्टर की सलाह: ‘झाड़-फूंक’ से बचें

डॉ. शरद दुबे ने लोगों को चेतावनी दी है कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है और इसका एकमात्र बचाव टीकाकरण ही है।

  1. प्राथमिक उपचार: कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।

  2. समय पर टीका: घटना के 24 घंटे के भीतर पहला डोज जरूर लगवाएं।

  3. अंधविश्वास से दूरी: झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़कर अपनी जान जोखिम में न डालें।


सतना जिला अस्पताल: 10 दिनों का रिपोर्ट कार्ड (1-10 जनवरी)

विवरण आंकड़े
कुल लगाए गए इंजेक्शन (डोज) 1,104
नए मरीज (First Dose) 370
प्रतिदिन औसत मरीज (अस्पताल में) 110+
वैक्सीन का कुल स्टॉक 26,000

निष्कर्ष: जहाँ स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, वहीं नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी या धरपकड़ अभियान न चलने से जनता में आक्रोश है। लोग अब शाम के बाद अकेले घर से निकलने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें