राजगढ़। मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय खलबली मच गई जब सारंगपुर के एक शासकीय शिक्षक सुभाष शर्मा ने प्रदेश के राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिक्षक ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि मंत्री उन्हें ‘फर्जी जाति प्रमाण पत्र’ से जुड़े एक पुराने मामले को वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया है और शिक्षक की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

न्यूज़ हेडलाइंस
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वीडियो ने मचाया हड़कंप: शिक्षक सुभाष शर्मा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी जान को खतरा बताया।
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सरेराह धमकी का दावा: 5 मार्च को होटल के सामने रोककर मंत्री पर दबाव बनाने और षड्यंत्र में फंसाने का आरोप।
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SIT की मांग: थाना प्रभारी के सामने बयान देने से शिक्षक का इनकार; कहा— “वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में हो जांच।”
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सियासी घमासान: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से मंत्री की सदस्यता रद्द करने की मांग की।
क्या है पूरा विवाद
शिक्षक सुभाष शर्मा राजगढ़ जिले के सारंगपुर स्थित शासकीय कन्याशाला स्कूल में पदस्थ हैं। उनके आरोपों के अनुसार:
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धमकी का घटनाक्रम: मंत्री गौतम टेटवाल ने उन्हें बीच रास्ते में रोककर ‘जाति प्रमाण पत्र’ से संबंधित केस को वापस लेने को कहा।
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भविष्य बर्बाद करने की चेतावनी: आरोप है कि मंत्री ने केस न हटाने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर जीवन बर्बाद करने की धमकी दी।
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जांच पर सवाल: शिक्षक का कहना है कि स्थानीय थाना प्रभारी मंत्री जैसे रसूखदार व्यक्ति की जांच करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए इस मामले के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन होना चाहिए।
विपक्ष का प्रहार: “क्या कानून सबके लिए समान है
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को लेकर ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा:
“सत्ताधारियों के लिए कानून अलग क्यों है? एक शिक्षक मंत्री पर गंभीर आरोप लगा रहा है, फिर भी प्रशासन चुप है। मुख्यमंत्री जी इस मामले का संज्ञान लें, निष्पक्ष जांच कराएं और दोषी पाए जाने पर मंत्री टेटवाल की विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए।”
प्रशासनिक स्थिति और मंत्री की चुप्पी
शिक्षक ने इस मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री, डीजीपी, कलेक्टर और एसपी राजगढ़ को भेज दी है।
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मंत्री का पक्ष: इस पूरे प्रकरण और इतने गंभीर आरोपों के बावजूद राज्यमंत्री गौतम टेटवाल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।
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पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने शिक्षक को बयान के लिए बुलाया है, लेकिन शिक्षक ने निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए वरिष्ठ स्तर पर जांच की मांग दोहराई है।
जाति प्रमाण पत्र का पेचीदा मामला
यह विवाद उसी जाति प्रमाण पत्र के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसे लेकर शिक्षक ने पहले कानूनी चुनौती दी थी। अब यह मामला व्यक्तिगत रंजिश और राजनीतिक दबाव के एक बड़े ड्रामे में तब्दील हो चुका है। राजगढ़ जिले में इस घटना को लेकर शिक्षकों और आम जनता के बीच भारी चर्चा है।








