भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सवाल पूछने के अधिकार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा सचिवालय और सरकार पर मिलीभगत कर उनके प्रश्नों की मूल भावना और भाषा बदलने या एडिट करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इसे विशेषाधिकार हनन करार देते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस विधायकों को ‘सवाल पूछने की ट्रेनिंग’ लेने की सलाह दी है।
कांग्रेस का आरोप: सवाल की भाषा और भाव बदले
विपक्ष ने सदन के अंदर उदाहरण देते हुए अपने आरोपों को प्रमाणित करने का प्रयास किया:
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जयवर्धन सिंह का दावा: पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने उदाहरण दिया कि उन्होंने राघौगढ़ डिग्री कॉलेज में कोर्स की जानकारी मांगी थी, लेकिन जवाब में उन्हें दूसरे कॉलेज का नाम और ऐसे पीजी कोर्स की जानकारी दी गई जो उनके पूछे गए कॉलेज में चलते ही नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गलत जवाब दिया गया और अब तो सवाल ही बदल दिया गया है।
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बाला बच्चन की शिकायत: पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने अपने प्रश्न (क्रमांक 506) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भावांतर योजना के तहत किन फसलों की और कब खरीदी हुई, यह पूछा था, लेकिन उन्हें केवल योजना लागू होने की जानकारी दी गई और आगे का सवाल पूरी तरह से बदल दिया गया।
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मुख्य आरोप: कांग्रेस ने साफ कहा कि सरकार जैसा उत्तर देना चाहती है, वैसा ही सवाल बना देती है, जो बेईमानी है और विधायकों के विशेषाधिकार का हनन है।
सरकार का पलटवार: ‘ट्रेनिंग लो’, जवाब से नहीं भाग रहे
विपक्ष के गंभीर आरोपों के जवाब में सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी:
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संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय: उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया और कहा कि विधायकों को सवाल पूछने की ट्रेनिंग देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई बार विधायक इतने लंबे सवाल पूछते हैं कि उनका जवाब ऑटो में भरकर लाना पड़ेगा। उन्होंने पिन पॉइंट प्रश्न पूछने का सुझाव दिया।
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कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग: उन्होंने आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि “ना सवाल बदले गए हैं, ना सरकार जवाब से भागती है।” उन्होंने विपक्ष पर फेस सेविंग के लिए “अनर्गल बातें” करने का आरोप लगाया।
विधानसभा में सवालों का ‘गणित’
जानकारों के अनुसार, विधानसभा में सवाल पूछने का निर्धारित प्रारूप होता है। इस सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को 1497 सवाल मिले हैं, जिसमें 751 तारांकित (मौखिक जवाब) और 746 अतारांकित (लिखित जवाब) प्रश्न शामिल हैं।
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नियमों के अनुसार, यदि विधायक लंबे सवाल पूछते हैं, तो अध्यक्ष की अनुमति से उसे छोटा या बड़ा किया जा सकता है, लेकिन शर्त यह है कि सवाल की मूल भावना को बरकरार रखा जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप इसी मूल भावना को बदलने को लेकर है।









