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श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट बनेगी यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क!,विदेशी विशेषज्ञ बोले- यहां सब कुछ है मौजूद

Satna News :भगवान श्रीराम की तपोस्थली और विंध्य की पहाड़ियों में बसे अद्भुत भूवैज्ञानिक रहस्यों को समेटे चित्रकूट को जल्द ही यूनेस्को ...

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| सतना टाइम्स

Satna News :भगवान श्रीराम की तपोस्थली और विंध्य की पहाड़ियों में बसे अद्भुत भूवैज्ञानिक रहस्यों को समेटे चित्रकूट को जल्द ही यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की वैश्विक पहचान मिल सकती है। यहां तीन दिवसीय दौरे पर आई यूनेस्को की विशेषज्ञ टीम ने चित्रकूट को जियोपार्क के लिए पहली नजर में उपयुक्त पाया है। टीम ने कहा है कि वे यूनेस्को के समक्ष इसकी स्थापना के लिए मजबूत पक्ष रखेंगी।

ईरानी विशेषज्ञ ने जताई सहमति

जियोपार्क विशेषज्ञ और टीम लीडर ईरान की डॉ. अलीरेजा अमरीकजामी ने बुधवार को अपने दौरे के अंतिम दिन स्थानीय लोगों से संवाद करते हुए कहा, “चित्रकूट जियोपार्क के लिए एक बेहतरीन जगह है।” उन्होंने ईरान के केशम द्वीप का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे जियोपार्क का दर्जा मिलने से यहां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन बढ़ेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और यहां के हस्तशिल्प व कृषि उत्पादों को एक वैश्विक बाजार मिलेगा।

लाखों साल पुरानी चट्टानों और झरनों का किया निरीक्षण

डॉ. अलीरेजा के नेतृत्व में आई इस टीम में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व उप महानिदेशक डॉ. सतीश त्रिपाठी और जियोपार्क के समन्वयक डॉ. अश्वनी अवस्थी समेत कई विशेषज्ञ शामिल थे। टीम ने अपने तीन दिवसीय दौरे में चित्रकूट के दर्जनों स्थलों का निरीक्षण किया है।इनमें शबरी जलप्रपात, गुप्त गोदावरी की रहस्यमयी गुफाएं, कामदगिरि पर्वत, कालिंजर का किला, बृहस्पतिकुंड जलप्रपात, टन-टन पहाड़ की बजने वाली चट्टानें प्रमुख है।विशेषज्ञों की टीम यहां मौजूद लाखों वर्ष पुरानी चट्टानों, जीवाश्मों और अद्भुत प्राकृतिक संरचनाओं को देखकर बेहद प्रभावित हुई।

क्या होगा फायदा?

जियोपार्क समन्वयक डॉ. अश्वनी अवस्थी ने बताया कि इस दर्जे से न केवल भगवान राम से जुड़े स्थलों को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिलेगी, बल्कि स्थानीय महिलाओं को होम-स्टे, गाइड ट्रेनिंग और हस्तकला से सीधे लाभ होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रुकेगा।उल्लेखनीय है कि चित्रकूट में जियोपार्क की स्थापना का प्रस्ताव सोसाइटी ऑफ अर्थ साइंटिस्ट के सचिव डॉ. सतीश त्रिपाठी और डॉ. अश्वनी अवस्थी के प्रयासों से ही आगे बढ़ा है। इस परियोजना पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें मिलकर काम कर रही हैं और जल्द ही इसका एक विस्तृत डोजियर (प्रस्ताव) यूनेस्को मुख्यालय को भेजा जाएगा।

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