नरसिंहपुर: मध्य प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से प्रतिबंधित ‘थाई मांगुर’ मछली की अवैध तस्करी का बड़ा रैकेट पकड़ा गया है। नरसिंहपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के नागपुर से नर्मदापुरम ले जाई जा रही करीब 3 हजार किलो जिंदा प्रतिबंधित मछली जब्त की है, जिसे बाद में जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर जिंदा दफना दिया गया। इस मछली को खाने से कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है।
महाराष्ट्र के रास्ते हो रही थी तस्करी
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कार्रवाई: शनिवार देर रात स्टेशनगंज थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सिंहपुर गांव के पेट्रोल पंप के पास नाकेबंदी की।
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जब्ती: पुलिस ने दो संदिग्ध पिकअप वाहनों (MH 49 BZ 2008 और MH 49 BZ 5655) को रोका, जिनमें तिरपाल से ढकी बाल्टियों में करीब 3,000 किलो (प्रत्येक वाहन में 1,500 किलो) जिंदा मछली भरी हुई थी।
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तस्कर: पुलिस ने नागपुर के सतीश परिहार, सतीश गोंड और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है। वे मछलियों को बनखेड़ी क्षेत्र में बेचने की योजना बना रहे थे।
‘थाई मांगुर’ क्यों है प्रतिबंधित और खतरनाक?
मत्स्योद्योग सहायक संचालक बबीता चौरसिया ने जांच में पुष्टि की कि यह ‘थाईलैंड मूल की मांगुर प्रजाति’ है, जो भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है।
| प्रतिबंध का कारण | स्वास्थ्य जोखिम |
| पर्यावरणीय खतरा | राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2000 में इस पर पाबंदी लगाई। |
| पारिस्थितिकी असंतुलन | यह देशी मछलियों को 70% तक नष्ट कर देती है, जिससे जलाशयों का संतुलन बिगड़ता है। |
| विषैला पालन | इसे सड़े मांस और प्रदूषित पानी का इस्तेमाल करके पाला जाता है, जो पानी को जहरीला बनाता है। |
| गंभीर बीमारी | विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सेवन से उपभोक्ताओं को कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। |
पर्यावरण संरक्षण के लिए जिंदा दफनाया
मछलियों को जब्त करने के बाद, पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा बताते हुए, उन्हें बड़े गड्ढे में दफनाकर नष्ट कर दिया गया।
एसपी नरसिंहपुर ने कहा कि ऐसी तस्करी से न सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ता है, बल्कि स्थानीय मछली किसानों की आजीविका पर भी असर पड़ता है। पुलिस ने तीनों तस्करों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और अब अंतरराज्यीय कनेक्शनों की जांच कर रही है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि सरकार ने इस प्रतिबंधित मछली की बिक्री रोकने के लिए स्थानीय मछली बाजारों में क्या विशेष निगरानी शुरू की है?








