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सीधी। जज्बे को सलाम! खप्पर वाले घर से निकला MP का लाल; पिता छील रहे थे आलू, तभी मिली बेटे के ‘टॉपर’ बनने की खबर, मिठाई खिलाने तक के पैसे नहीं, पर आँखों में थे गर्व के आँसू

सीधी। जब इरादे फौलादी हों, तो अभाव भी अवसर बन जाते हैं। मध्य प्रदेश 10वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों में सीधी जिले ...

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| सतना टाइम्स

सीधी। जब इरादे फौलादी हों, तो अभाव भी अवसर बन जाते हैं। मध्य प्रदेश 10वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों में सीधी जिले के अभय गुप्ता ने पूरे प्रदेश में दूसरी रैंक (Second Rank) हासिल कर इतिहास रच दिया है। अभय की यह सफलता साधारण नहीं है, क्योंकि उनके घर की दीवारें कच्ची हैं और छत जर्जर, लेकिन उनके सपनों की उड़ान बहुत ऊँची है। जिस समय पूरे प्रदेश में उनके नाम की चर्चा हो रही थी, उनके पिता मजदूरी से लौटकर घर में आलू छील रहे थे।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • अभावों में चमक: न घर पक्का, न जेब में पैसे; जर्जर मकान में रहने वाले अभय ने मेरिट लिस्ट में पाया दूसरा स्थान।

  • भावुक पल: पिता कैलाश गुप्ता के पास लोगों का मुँह मीठा कराने तक के पैसे नहीं थे, पर सीना गर्व से चौड़ा था।

  • सादगी की मिसाल: कलेक्टर से मिलने के लिए भी बस का सहारा लिया; परिवार के पास मोटरसाइकिल तक नहीं।

  • डिजिटल दूरी: न मोबाइल, न टीवी; उत्कृष्ट विद्यालय के हॉस्टल में रहकर अभय ने की दिन-रात तपस्या।


जब घर पहुँचे लोग, तो पिता को यकीन नहीं हुआ

अभय के पिता कैलाश गुप्ता एक साधारण किसान हैं और खेतों में मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं।

  1. सादा जीवन: सफलता की खबर मिलने के बाद भी घर में कोई ताम-झाम नहीं था। कैलाश अपनी पत्नी के साथ रात के खाने के लिए आलू छील रहे थे।

  2. सच्ची खुशी: पिता कैलाश बताते हैं, “खुशी तो बहुत है, लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि जो लोग बधाई देने आए, उन्हें मिठाई खिला सकूँ।” अभय के घर के हालात ऐसे हैं कि उनके पास ढंग का कच्चा मकान भी नहीं है।

बिना मोबाइल और विलासिता के ‘टॉप’ का सफर

आज के दौर में जहाँ मोबाइल को पढ़ाई का आधार माना जाता है, अभय ने मोबाइल के बिना यह मुकाम पाया।

  • कंप्यूटर में रुचि: अभय को कंप्यूटर का शौक है, जिसके लिए वह अपने चचेरे भाई के पास जाते थे।

  • लक्ष्य के प्रति एकाग्रता: प्राचार्य एस.एन. त्रिपाठी के अनुसार, अभय शुरू से ही मेधावी और शांत स्वभाव के रहे हैं। हॉस्टल के सीमित संसाधनों में उन्होंने खुद को केवल किताबों तक सीमित रखा।


सफलता के बाद भी वही सादगी: “अभी नंबर कम आए हैं”

अपनी इस उपलब्धि पर अभय के चेहरे पर केवल एक हल्की मुस्कान थी। जब परिजनों ने बधाई दी, तो उन्होंने विनम्रता से कहा— “अभी नंबर कम आए हैं।” उनकी यह भूख आगे और बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का संकेत देती है। कलेक्टर से मिलने के लिए भी अभय बस से मुख्यालय पहुँचे, जो उनके परिवार की संघर्षपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।


खबर का सारांश 

  • टॉपर: अभय गुप्ता (स्कूल क्रमांक-1, सीधी)।

  • रैंक: MP बोर्ड 10वीं में प्रदेश में दूसरा स्थान।

  • पारिवारिक स्थिति: पिता मजदूर, जर्जर मकान, संसाधनों का अभाव।

  • विशेष: मोबाइल और निजी वाहन के बिना तय किया सफलता का सफर।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें