सीधी जिले से आई यह खबर वाकई रोमांचक है! विंध्य का यह क्षेत्र हमेशा से ही भूवैज्ञानिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है, लेकिन 12 मीटर लंबे कंकाल और ढाई लाख साल पुराने जीवाश्मों का दावा इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की खोज बना सकता है। सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक स्थित अत्रेला पहाड़ी पर मिले इन अवशेषों ने वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर दिया है। सतना के पीएम श्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की टीम इस पर विस्तृत शोध कर रही है।

क्या है यह ‘रहस्यमयी’ ढांचा?
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प्राचीन विशालकाय जीव: शुरुआती जांच में मिले दांतों और हड्डियों के इनेमल पैटर्न से संकेत मिलते हैं कि यह प्रोबोसिडियन युग के जीव हैं। ये आधुनिक हाथियों के विशालकाय पूर्वज (जैसे मैमथ या स्टेगोडन) हो सकते हैं।
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शाकाहारी होने के प्रमाण: दांतों के पैटर्न से पुष्टि हुई है कि यह जीव शाकाहारी था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्लेइस्टोसीन युग का हो सकता है।
सोन नदी घाटी: जीवाश्मों का खजाना
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र सोन नदी घाटी के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राचीन तलछटी निक्षेपों के लिए प्रसिद्ध है।
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उल्कापिंडीय क्षेत्र: डॉ. एससी राय और डॉ. हर्षित सोनी का मानना है कि यह इलाका प्राचीन काल में उल्कापिंडीय गतिविधियों का केंद्र रहा होगा, जिस कारण यहाँ जीवाश्मों के दबे होने की प्रबल संभावना है।
उम्र का निर्धारण: यूरेनियम डेटिंग
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अनुमानित आयु: फिलहाल इन अवशेषों को 25,000 से लेकर 2,50,000 साल तक पुराना बताया जा रहा है।
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वैज्ञानिक पुष्टि: सटीक उम्र का पता लगाने के लिए यूरेनियम डेटिंग और कार्बन डेटिंग का सहारा लिया जाएगा। टीम अब इन बिखरे हुए हिस्सों को जोड़कर एक पूर्ण ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है।
स्थानीय लोगों की भूमिका
यह खोज कोराउली कला गांव के स्थानीय लोगों की सजगता से संभव हो पाई, जिन्होंने पहाड़ियों पर बड़े कंकाल दिखने की सूचना कॉलेज टीम को दी थी।
खोज का सारांश
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | अत्रेला पहाड़ी, सिहावल ब्लॉक, जिला सीधी (MP)। |
| जीव का प्रकार | प्रोबोसिडियन (प्राचीन हाथी के पूर्वज)। |
| अनुमानित लंबाई | लगभग 12 मीटर लंबा कंकाल। |
| वैज्ञानिक टीम | पीएम श्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सतना। |
| तकनीक | यूरेनियम डेटिंग से होगी सटीक आयु की जांच। |








