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शर्मनाक लापरवाही: खुद खाने की बजाए बच्चे कुत्तों को खिला रहे मिड-डे मील! मुरैना के स्कूलों में अनाज की क्वालिटी पर गंभीर सवाल

मुरैना (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना में गंभीर लापरवाही का ...

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| सतना टाइम्स

मुरैना (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। नगर निगम क्षेत्र के सुआलाल का पुरा प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को परोसा गया भोजन इतनी खराब गुणवत्ता का था कि बच्चों ने उसे खाने के बजाय स्कूल परिसर में मौजूद कुत्तों के आगे फेंकना बेहतर समझा। यह घटना बच्चों के स्वास्थ्य और योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सब्जी में पानी और कच्ची रोटियां

यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है; नगर निगम क्षेत्र के 100 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में इसी तरह की खराब गुणवत्ता वाला मिड-डे मील परोसे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

  • लापरवाही: नगर निगम ने मिड-डे मील तैयार करने की जिम्मेदारी पुष्पक महिला समूह को दी है। आरोप है कि समूह द्वारा तैयार भोजन न तो मेन्यू के अनुसार है और न ही उसमें पर्याप्त पोषक तत्व हैं।

  • क्वालिटी: वायरल वीडियो में दिख रहा है कि सोयाबीन बड़ी की सब्जी में पानी ऊपर तक भरा हुआ है, और सब्जी के नाम पर सिर्फ कुछ सोयाबीन की बड़ी तैरती नजर आ रही हैं। आलू-टमाटर की सब्जी भी पानी जैसी है और मशीन से आने वाली रोटियां आधी कच्ची दिखाई दे रही हैं।

Mid Day meal Poor Quality In Morena School

‘जैसा आता है, वैसा ही परोसना पड़ता है’

खाना परोसने वाली महिला रसोइया का बयान भी चौंकाने वाला है। उन्होंने बताया कि वह 10-12 वर्षों से भोजन परोस रही हैं, लेकिन भोजन की गुणवत्ता पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है।

“जैसा खाना गाड़ी में आता है, वैसा ही मुझे बच्चों को परोसना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।”

हेडमास्टर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मिड-डे मील की क्वालिटी लंबे समय से खराब आ रही है। उन्होंने समूह संचालक और सीनियर अधिकारियों को कई बार इसकी जानकारी दी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना, जिसका उद्देश्य बच्चों को पोषण देना और उन्हें स्कूलों से जोड़ना है, वह अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें