सतना (मध्य प्रदेश):थैलेसीमिया पीड़ित 6 मासूम बच्चों को एचआईवी (HIV) संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले ने सतना को झकझोर कर रख दिया है। इस शर्मनाक घटना के बाद जिला प्रशासन ‘खून की दलाली’ करने वाले सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए सड़कों पर उतर आया है। शनिवार को एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया ने लगातार दूसरे दिन ‘फिल्मी स्टाइल’ में स्टिंग ऑपरेशन कर एक और बड़े दलाल को रंगे हाथों दबोचा।
सर्किट हाउस बना ‘जाल’, एसडीएम ने खुद गिने नोट
गुरुवार को हुई कार्रवाई के बाद अस्पताल के दलाल सतर्क हो गए थे। इसे देखते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने अपनी रणनीति बदली। उन्होंने अस्पताल के बजाय सर्किट हाउस को अपना ठिकाना बनाया। स्टिंग से पहले एसडीएम ने कैमरे के सामने 500-500 के 8 नोट (कुल 4000 रुपए) गिने और उनके सीरियल नंबर रिकॉर्ड किए, ताकि सबूत पुख्ता रहे।
डमी खरीदार ने चला ‘इमोशनल कार्ड’
प्रशासन ने एक व्यक्ति को ‘डमी खरीदार’ बनाया। उसने दलाल शिवम वर्मा को फोन लगाया और रोते हुए कहा— “मैं गांव से अपनी बीमार पत्नी को लेकर आ रहा हूं, उसे खून की सख्त जरूरत है, प्लीज मदद कर दो।” दलाल झांसे में आ गया और उसने सर्किट हाउस चौक पर मिलने का समय दिया।
30 मिनट का मोलभाव और गिरफ्तारी
सड़क पर करीब 30 मिनट तक दलाल और डमी खरीदार के बीच मोलभाव चला। अंततः 4000 रुपये में खून की एक यूनिट का सौदा तय हुआ।
जैसे ही दलाल शिवम वर्मा ने 4000 रुपये अपनी जेब में रखे और बाइक स्टार्ट की, वहां सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों और एसडीएम के ड्राइवर ने उसे पीछे से दबोच लिया। तलाशी में वही नोट बरामद हुए जिनके नंबर प्रशासन ने पहले ही नोट कर लिए थे।
इन आरोपियों पर गिरी गाज
कोतवाली पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है:
-
शिवम वर्मा (निवासी कोठी)
-
अंकित नामदेव (निवासी रेगांव)
-
एक अन्य सहयोगी
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125(a), 271 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई है।
अब अस्पताल के ‘भेदी’ निशाने पर
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस राज से पर्दा उठाने में जुटी है कि आखिर अस्पताल के भीतर का वो कौन सा ‘विभीषण’ है, जो इन दलालों को ब्लड उपलब्ध कराता था। जांच के घेरे में ब्लड बैंक के कुछ कर्मचारी भी हैं। प्रशासन का साफ संदेश है— मासूमों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।








