सतना। जिले के सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने पेश कर दी। रघुराजनगर और कोठी तहसील कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों द्वारा खुलेआम रिश्वत लेने के वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। आनन-फानन में जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

प्रमुख बिंदु
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वायरल वीडियो का धमाका: दो अलग-अलग तहसीलों के बाबू रिश्वत लेते कैमरे में कैद।
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बर्खास्त बाबू का रसूख: लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद बर्खास्त बाबू फिर से सरकारी कुर्सी पर बैठकर वसूली करते दिखा।
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प्रशासन सख्त: एसडीएम और तहसीलदार ने दिए जांच और कड़ी कार्रवाई के संकेत।
बर्खास्त होने के बाद भी ‘कुर्सी’ का मोह और वही पुराना काम
पहला सनसनीखेज मामला रघुराजनगर तहसील (कलेक्ट्रेट) से जुड़ा है। वीडियो में दिख रहा शख्स कथित तौर पर रामशरण प्रजापति है। गौर करने वाली बात यह है कि इसे 2015 में लोकायुक्त ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था, जिसके बाद इसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
बावजूद इसके, वह नायब नजीर की कुर्सी पर बैठकर रिकॉर्ड खंगालते और काम के बदले दफ्तर के बाहर ले जाकर ₹1000 की रिश्वत लेते नजर आ रहा है। सवाल यह है कि एक बर्खास्त कर्मचारी सरकारी दफ्तर और फाइलों तक कैसे पहुँच रहा है?
बंटवारा और नामांतरण की ‘फीस’ ₹1000
दूसरा मामला कोठी तहसील कार्यालय का है। यहाँ पदस्थ बाबू उमेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने बंटवारा और नामांतरण जैसे कामों के लिए आए ग्रामीणों से खुलेआम पैसों की मांग की। वायरल वीडियो में उन्हें कथित रूप से ₹1000 की घूस लेते हुए दिखाया गया है।
अधिकारियों का क्या कहना है?
प्रशासन ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:
“वीडियो हमारे संज्ञान में आया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित के खिलाफ बेहद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
— राहुल सिलाढ़िया, एसडीएम सिटी
“वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी।”
— सौरभ द्विवेदी, तहसीलदार कोठी








