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सतना: ‘कागजों में सेहतमंद, हकीकत में मौत!’ मझगवां में एक साल की मासूम ने कुपोषण से तोड़ा दम; रिकॉर्ड्स और हकीकत के बीच उलझा सिस्टम, बाल विवाह का भी खुलासा

मझगवां (सतना)। मध्य प्रदेश के सतना जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियानों की पोल खुल गई है। मझगवां क्षेत्र ...

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| सतना टाइम्स

मझगवां (सतना)। मध्य प्रदेश के सतना जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियानों की पोल खुल गई है। मझगवां क्षेत्र में सोमवार सुबह एक साल की बच्ची ‘भारती’ की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्ची लंबे समय से कुपोषण (सूखा रोग) से जूझ रही थी, जबकि स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों में उसे ‘स्वस्थ’ दिखाने की कोशिश की गई है। इस मामले में प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन आंकड़ों के खेल ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यूज़ हेडलाइंस

  • सिस्टम का विरोधाभास: अस्पताल के रिकॉर्ड में जन्म के समय वजन 2.200 ग्राम (गंभीर कुपोषित), लेकिन टीकाकरण कार्ड में वजन सामान्य दिखाने का दावा।

  • बाल विवाह का दंश: बच्ची की माँ की शादी महज 13 साल में हुई, 14 की उम्र में बनी पहली बार माँ।

  • परिजनों का दर्द: “सूखा रोग से तड़प रही थी बच्ची, माँ मजदूरी पर साथ ले जाती थी।”

  • प्रशासनिक रुख: एसडीएम और सिविल सर्जन मौके पर पहुँचे; रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का आश्वासन।


आंकड़ों की बाजीगरी: अस्पताल बनाम टीकाकरण कार्ड

बच्ची की मौत के बाद जब दस्तावेजों की जांच की गई, तो चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं:

  1. जन्म के समय: 15 अप्रैल 2025 को जन्मी भारती का वजन मात्र 2.200 ग्राम था, जो चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ‘गंभीर कुपोषण’ की श्रेणी में आता है।

  2. टीकाकरण कार्ड: कागजों में दिखाया गया कि 9 महीने में उसका वजन 7.100 किलो हो गया, जो कि अल्प कुपोषण (7.500 किलो से कम) की सीमा के करीब था।

  3. हकीकत: परिजनों के अनुसार बच्ची कभी स्वस्थ नहीं हुई और उसे लगातार बुखार आ रहा था।

कुपोषण के साथ सामाजिक कुरीति का साया

एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर की जांच में एक और विचलित करने वाला तथ्य सामने आया। मृत बच्ची की माँ खुद बाल विवाह का शिकार थी। महज 13 साल में उसकी शादी कर दी गई थी और 14 साल में उसने पहली संतान को जन्म दिया। कम उम्र में माँ बनने के कारण माँ और बच्चा दोनों ही शारीरिक रूप से कमजोर थे।


अधिकारियों की सफाई और फील्ड विजिट

सोमवार को एसडीएम, सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला और बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी पीड़ित परिवार के घर पहुँचे।

  • सिविल सर्जन का बयान: “दस्तावेजों में वजन ठीक लग रहा है। हो सकता है रात में दूध पिलाने के बाद डकार न दिलाने (पीठ न थपथपाने) की वजह से कोई समस्या हुई हो।”

  • जमीनी हकीकत: पिता पन्ना में ट्रैक्टर चलाता है और माँ खेतों में मजदूरी करती है। गरीबी और जागरूकता की कमी के चलते बच्ची का सही इलाज नहीं हो सका और परिवार झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर काटता रहा।


खबर का सारांश 

  • मृतक: भारती (1 वर्ष), निवासी मझगवां।

  • विवाद: सरकारी रिकॉर्ड में सामान्य विकास बनाम परिजनों का कुपोषण का दावा।

  • जांच: एसडीएम सतना द्वारा विस्तृत जांच के आदेश।

  • सामाजिक पहलू: बाल विवाह और गरीबी ने ली मासूम की जान।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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