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सतना: फर्जी नाम-पते और गायब मोबाइल नंबरों ने उलझाई HIV संक्रमण की गुत्थी, 6 मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़, स्टिंग में दलालों का भंडाफोड़

सतना (मध्य प्रदेश): सतना जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। थैलेसीमिया से ...

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| सतना टाइम्स

सतना (मध्य प्रदेश): सतना जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। थैलेसीमिया से पीड़ित जिन 6 बच्चों को जीवनरक्षक खून की जरूरत थी, उन्हें सिस्टम की लापरवाही और लालच ने एचआईवी (HIV) जैसा लाइलाज दर्द दे दिया है। इस मामले की जांच में अब ‘गायब डोनर्स’ और ‘फर्जी दस्तावेजों’ की दीवार खड़ी हो गई है। लगभग 50% रक्तदाताओं (Blood Donors) का अता-पता नहीं है, जिससे संक्रमण की जड़ तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

250 डोनर्स, 6 बच्चे और एक खौफनाक सच

यह मामला 20 मार्च को तब प्रकाश में आया, जब 126 बार खून चढ़वाने वाली 15 वर्षीय किशोरी एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद एक के बाद एक कुल 6 बच्चों (उम्र 3 से 15 वर्ष) में संक्रमण की पुष्टि हुई। इन बच्चों को पिछले कुछ सालों में करीब 250 अलग-अलग डोनर्स से खून चढ़ाया गया था।

प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती उन 250 डोनर्स को ट्रैक करना है, लेकिन रिकॉर्ड में मिले आधे से ज्यादा नाम, पते और मोबाइल नंबर फर्जी या बंद पाए गए हैं। जिन थोड़े बहुत डोनर्स का पता चला भी, उनमें से केवल 6 ही दोबारा जांच के लिए सामने आए हैं।

स्टिंग ऑपरेशन में ‘खून के दलालों’ का पर्दाफाश

प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे ‘खून के काले कारोबार’ का खुलासा एक स्टिंग ऑपरेशन में हुआ। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के पास से तीन संदिग्ध एजेंटों को पकड़ा गया है।

  • मोडस ऑपरेंडी: ‘रिप्लेसमेंट डोनर सिस्टम’ की आड़ में ये दलाल सक्रिय थे। जब दूर-दराज से आए मरीज खून के बदले डोनर नहीं दे पाते थे, तो ये एजेंट पैसों के लालच में अनजान और असुरक्षित डोनर्स की व्यवस्था करते थे।

  • आशंका है कि पैसों के लिए खून देने वाले इन्हीं पेशेवर डोनर्स में से कोई संक्रमित रहा होगा, जिसकी वजह से यह वायरस बच्चों तक पहुंचा।

कलेक्टर ने दिए लिंक जोड़ने के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एसडीएम और ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देश दिए हैं कि पकड़े गए एजेंटों और संक्रमित बच्चों को खून चढ़ाए जाने की तारीखों के बीच ‘कनेक्शन’ तलाशा जाए।

कलेक्टर ने कहा, “आरोपियों के वित्तीय लेनदेन (कैश या ऑनलाइन) की जांच की जा रही है। अगर पैसों के लेनदेन की तारीख बच्चों को खून चढ़ाने की तारीख से मेल खाती है, तो यह इस अपराध का सबसे बड़ा सबूत होगा।”

रिकॉर्ड भगवान भरोसे, कई एजेंसियां जांच में जुटीं

फिलहाल CDSCO (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) और एमपी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की संयुक्त टीमें जांच कर रही हैं। लेकिन अधिकारी दबी जुबान में स्वीकार रहे हैं कि ब्लड बैंक के रिकॉर्ड बेहद खराब स्थिति में हैं। गलत फोन नंबर और गुमनाम पहचान के चलते असली गुनहगार तक पहुंचना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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