मध्य प्रदेश में ममता को शर्मसार कर देने वाली लगातार दूसरी घटना सामने आई है। खरगोन की हृदयविदारक घटना के अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि सागर जिले के केसली में एक मां ने अपनी चार मासूम बेटियों की जान लेने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। इस सामूहिक मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सागर जिले के केसली थाना क्षेत्र के खमरिया गांव में एक ही झटके में एक पूरा परिवार खत्म हो गया। खेत का वह कुआं चार मासूम जिंदगियों के लिए काल बन गया।

पत्थर दिल बनी मां: बारी-बारी से फेंका
जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय सविता लोधी अपनी चार बेटियों को लेकर खेत पर गई थी। वहाँ उसने रूह कंपा देने वाला कदम उठाया:
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मासूमों की हत्या: सविता ने अपनी चार बेटियों—जिनमें सबसे बड़ी 7 साल की थी और सबसे छोटी महज 5 महीने की—को एक-एक कर कुएं में फेंक दिया।
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खुदकुशी: जब उसे यकीन हो गया कि चारों बेटियां डूब चुकी हैं, तब उसने पास ही एक पेड़ पर फंदा बनाया और खुद भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
कारण: महीनों तक पति का घर न आना और कलह
प्रारंभिक जांच और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार:
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अकेलापन और परेशानी: सविता का पति चंद्रभान लोधी पेशे से ट्रक ड्राइवर है। वह काम के सिलसिले में महीनों तक घर नहीं आता था।
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पारिवारिक कलह: माना जा रहा है कि लंबे समय तक अकेले रहने और घरेलू कलह की वजह से सविता मानसिक तनाव में थी, जिसके चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
पुलिस और ग्रामीणों की मशक्कत
गुरुवार दोपहर जब घटना का पता चला, तो गांव में हड़कंप मच गया:
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शवों को निकाला: ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कुएं में कई गोते लगाए और चारों बच्चियों के शव बाहर निकाले।
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जांच शुरू: केसली थाना प्रभारी लोकेश पटेल और एफएसएल (FSL) की टीम ने मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है।
MP में दो दिन में दूसरी बड़ी वारदात
मध्य प्रदेश में यह दो दिनों के भीतर दूसरी ऐसी घटना है:
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खरगोन (बुधवार): सनावद में एक मां (नानी बाई) ने अपने तीन बच्चों को कुएं में फेंका था। वहां मां तैरना जानने के कारण बच गई, लेकिन बच्चों की मौत हो गई।
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सागर (गुरुवार): यहाँ मां ने अपनी जान भी दे दी और चारों बेटियों को भी साथ ले गई।
निष्कर्ष: मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक चिंता
लगातार हो रही ये घटनाएं समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलेपन और प्रसव के बाद के तनाव (Post-Partum Depression) से जूझ रही महिलाओं की काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग बेहद अनिवार्य है, ताकि ऐसे ‘खूनी अंत’ को रोका जा सके।








