दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) | कभी संघर्षों के लिए जाने जाने वाले बस्तर की पहचान अब खेल के मैदानों से होगी। क्रिकेट लेजेंड सचिन तेंदुलकर ने दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान बस्तर की खेल प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दिलाने का बीड़ा उठाया है। सचिन ने छिंदनार में बच्चों के बीच घोषणा की कि वे बस्तर में 100 से अधिक खेल मैदानों के निर्माण में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि यहाँ का टैलेंट किसी भी महानगर से कम नहीं है, बस उन्हें सही साधनों की जरूरत है।

मुख्य बिंदु
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खेल क्रांति का वादा: सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन बस्तर के युवाओं के लिए 100 मैदान और बेहतर कोचिंग की व्यवस्था करेगा।
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रस्साकशी का मुकाबला: रस्साकशी (Tug of War) में सारा तेंदुलकर की टीम ने सचिन की टीम को हराया; मास्टर ब्लास्टर ने हारकर भी जीता सबका दिल।
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जीवन का मंत्र: बच्चों को दी सीख— “दोस्त आईने और परछाई जैसा होना चाहिए, जो कभी झूठ न बोले और कभी साथ न छोड़े।”
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बुनकरों का सम्मान: तेंदुलकर परिवार ने महेश्वरी साड़ी की बुनाई देखी और स्थानीय कला की जमकर तारीफ की।
जब बेटी सारा से हार गए ‘क्रिकेट के भगवान’
मैदान पर सबसे दिलचस्प नजारा तब दिखा जब रस्साकशी का खेल शुरू हुआ। एक ओर सचिन तेंदुलकर अपनी टीम के साथ जोर लगा रहे थे, तो दूसरी ओर उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया बच्चों के साथ मोर्चा संभाले हुए थीं। इस मुकाबले में सारा की टीम ने बाजी मार ली। सचिन ने अपनी इस हार का जश्न बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेलकर और जमकर मस्ती करके मनाया।
पिता की सीख और दोस्ती का पाठ
सचिन ने बस्तर के बच्चों को अपने स्वर्गीय पिता की वह सीख याद दिलाई जो उनके जीवन का आधार है। उन्होंने कहा, “क्रिकेट करियर तो कुछ समय का होता है, लेकिन एक अच्छा इंसान होना पूरी जिंदगी की उपलब्धि है।” उन्होंने बच्चों से कहा कि वे हमेशा एक-दूसरे के लिए सच्चे दोस्त बनें।
बस्तर के लिए सचिन का विजन
यह दौरा बस्तर की एक नई और सकारात्मक तस्वीर पेश करता है:
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इंफ्रास्ट्रक्चर: 100 खेल मैदान बनने से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को ट्रेनिंग के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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ट्रेनिंग: ‘मानदेशी फाउंडेशन’ के साथ मिलकर सचिन की टीम यहाँ के शिक्षकों और कोचों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देगी।
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वैश्विक मंच: सचिन का मानना है कि बस्तर की मिट्टी में छिपे इन ‘हीरों’ को अगर सही से तराशा जाए, तो ये दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करेंगे।
खबर का सारांश
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मुख्य अतिथि: सचिन तेंदुलकर (सपरिवार)।
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स्थान: छिंदनार, दंतेवाड़ा (बस्तर)।
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बड़ा ऐलान: 100 खेल मैदानों का निर्माण।
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प्रमुख संदेश: खेल के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनना जरूरी।








