नलखेड़ा (आगर-मालवा)। द्वापरकालीन सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान आम और खास सभी श्रद्धालु एक ही कतार में नजर आएंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने आदेश जारी किया है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?
मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव के अनुसार:
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भीड़ नियंत्रण: नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। गर्भगृह में प्रवेश बंद होने से कतारें तेजी से आगे बढ़ेंगी।
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सुगम दर्शन: कम समय में अधिक से अधिक लोग माता के दर्शन कर सकें, इसके लिए ‘चांदी द्वार’ और ‘त्रिशूल मंडपम’ से दर्शन की व्यवस्था की गई है।
नवरात्रि के लिए विशेष नियम
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नो VIP एंट्री: नवरात्रि के दौरान किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी को गर्भगृह के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी।
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समान व्यवस्था: सभी भक्तों को चांदी के द्वार के बाहर से ही माता की दिव्य प्रतिमा के दर्शन करने होंगे।
आम दिनों के लिए दर्शन का नया शेड्यूल
प्रबंध समिति ने सामान्य दिनों (नवरात्रि के बाद) के लिए भी समय-सारणी स्पष्ट की है:
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सोमवार से शुक्रवार: * सुबह 7:00 से 10:00 बजे तक: गर्भगृह से दर्शन।
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सुबह 10:00 से रात 9:30 बजे तक: चांदी द्वार से दर्शन।
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शनिवार और रविवार:
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सुबह 7:00 से 10:00 बजे तक: गर्भगृह से दर्शन।
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सुबह 10:00 से रात 9:30 बजे तक: त्रिशूल मंडपम से दर्शन।
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प्रशासन के सामने चुनौती
हालांकि आदेश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए प्रभावशाली व्यक्तियों (VIPs) को गर्भगृह में जाने से रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहती है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि इस बार व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि आम श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
दर्शन गाइड: एक नज़र में
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अवधि: चैत्र नवरात्रि 2026।
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प्रतिबंध: गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह बंद।
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दर्शन स्थल: चांदी द्वार / त्रिशूल मंडपम।
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लक्ष्य: VIP कल्चर खत्म कर सुगम दर्शन सुनिश्चित करना।








