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बड़वानी के जंगल में तेंदुए की रहस्यमयी मौत: न शरीर पर चोट, न पेट में मिला खाना-पानी; संक्रमण और भुखमरी से दम तोड़ने की आशंका

बड़वानी | मध्य प्रदेश के बड़वानी वन मंडल से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। ...

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| सतना टाइम्स

बड़वानी | मध्य प्रदेश के बड़वानी वन मंडल से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जंगल की सबसे फुर्तीली और ताकतवर शिकारी मानी जाने वाली करीब दो साल की एक मादा तेंदुआ जंगल में मृत पाई गई है। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। मादा तेंदुए के पेट में न तो भोजन का एक दाना मिला और न ही पानी। डॉक्टरों को शरीर के अंदर गंभीर संक्रमण के लक्षण मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बीमारी और भुखमरी के कारण इस बेज़ुबान शिकारी ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

मुख्य बातें:

  • रेहगुन गांव के पास मिला शव: मादा तेंदुए का शव रेहगुन गांव से करीब 200 मीटर दूर जंगल क्षेत्र में मंगलवार शाम मिला था, जिसे वन विभाग की टीम बड़वानी लेकर आई।
  • शरीर पर चोट के निशान नहीं: डीएफओ आशीष बंसोड़ के अनुसार तेंदुए के सभी बाहरी अंग सुरक्षित मिले हैं। शरीर पर किसी भी तरह के हमले, शिकार या बाहरी चोट के निशान नहीं हैं।
  • खाली पेट और पेट में घाव: पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. महेंद्र बघेल के मुताबिक मौत करीब 48 घंटे पहले हुई थी। तेंदुए के पेट में भोजन-पानी बिल्कुल नहीं था और पेट में घाव (Lesions) पाए गए हैं।
  • सेप्टीसीमिया की आशंका: डॉक्टरों का अनुमान है कि गंभीर संक्रमण के कारण तेंदुए ने खाना-पीना छोड़ दिया होगा, जिससे शरीर में अत्यधिक कमजोरी आ गई। संक्रमण फैलने से सेप्टीसीमिया (Blood Poisoning) होने की भी आशंका जताई जा रही है।
  • जहर के संकेत नहीं, विसरा सुरक्षित: शुरुआती जांच में जहर दिए जाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं।
  • पश्चिम निमाड़ में दूसरा मामला: इससे पहले 11 सितंबर को खरगोन जिले के चिरिया वन परिक्षेत्र में भी एक वयस्क तेंदुआ मृत मिला था, जो लकवे और भुखमरी से पीड़ित था।

जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर उठ रहे सवाल

पश्चिम निमाड़ अंचल में लगातार दो तेंदुओं की बीमारी और भुखमरी से मौत होना वन विभाग के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है। बड़वानी के जंगल क्षेत्र में करीब 3 से 4 तेंदुओं की मौजूदगी मानी जाती है। ऐसे में जंगलों में प्राकृतिक शिकार (भोजन) और पीने के पानी की उपलब्धता तथा वन्यजीवों के स्वास्थ्य की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रोटोकॉल के तहत हुआ अंतिम संस्कार

एसडीओ वन विजय कुमार मौर्य ने बताया कि बड़वानी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन विभाग के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत खंडवा सर्किल के वन संरक्षक प्रशांत कुमार सिंह की मौजूदगी में तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की अंतिम वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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