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MP Politics: दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात फिर कैबिनेट से दूरी, मोहन की बैठक से विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल के गायब होने के मायने?

MP Politics: मध्य प्रदेश की कृषि कैबिनेट में दो कद्दावर मंत्रियों, कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद सिंह पटेल की गैरमौजूदगी ने राज्य की ...

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| सतना टाइम्स

MP Politics: मध्य प्रदेश की कृषि कैबिनेट में दो कद्दावर मंत्रियों, कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद सिंह पटेल की गैरमौजूदगी ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। अमित शाह के साथ दिल्ली में हुई अलग-अलग मुलाकातों के ठीक बाद सीनियर मंत्रियों का यह कदम क्या किसी बड़े प्रशासनिक फेरबदल या दिल्ली वापसी का संकेत है?

दिल्ली दरबार में ‘सीक्रेट’ मुलाकात और उसके संकेत

कैबिनेट बैठक से ठीक पहले शनिवार (28 फरवरी 2026) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल को अलग-अलग चर्चा के लिए बुलाया था।

  • मुलाकात का क्रम: पहले सीएम मोहन यादव, फिर विजयवर्गीय और अंत में प्रह्लाद पटेल।

  • अटकलें: माना जा रहा है कि दिल्ली में इन दिग्गजों की राष्ट्रीय राजनीति में वापसी या संगठन में बड़ी भूमिका को लेकर ‘स्क्रिप्ट’ तैयार हो चुकी है। यही वजह है कि दिल्ली से लौटते ही दोनों मंत्रियों के तेवर बदले हुए नजर आए।

कृषि कैबिनेट से दूरी: इत्तेफाक या विरोध?

सोमवार को बड़वानी में हुई अहम कृषि कैबिनेट बैठक में इन दोनों कद्दावर मंत्रियों का न पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा।

  • कैलाश विजयवर्गीय: वे बैठक के समय अलीराजपुर में ‘भगोरिया उत्सव’ में पारंपरिक रंग में नजर आए और बाद में इंदौर में त्रिपुरा के सीएम से मिले।

  • प्रह्लाद पटेल: वे भोपाल में कार्यकर्ताओं के साथ व्यस्त रहे और फिर विदिशा रवाना हो गए।

  • विशाल अंतर: जिस बैठक को सरकार अपनी ‘किसानों के प्रति प्रतिबद्धता’ बता रही थी, उससे दो महत्वपूर्ण विभागों (नगरीय प्रशासन और पंचायत) के मंत्रियों का गायब होना ‘ऑल इज नॉट वेल’ का संकेत देता है।

‘सीनियर बनाम जूनियर’ की असहजता

भाजपा के भीतर यह चर्चा आम है कि दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति और बड़े पदों पर रहे विजयवर्गीय और पटेल जैसे नेता मोहन यादव (जो तुलनात्मक रूप से जूनियर हैं) की कैबिनेट में खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

  • विजयवर्गीय: बंगाल चुनाव के रणनीतिकार और राष्ट्रीय महासचिव रहे।

  • पटेल: 5 बार के सांसद और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे।

    इन दोनों ही नेताओं का कद राज्य कैबिनेट के बाकी मंत्रियों से कहीं अधिक बड़ा है, जिससे प्रशासनिक तालमेल में अक्सर ‘कम्युनिकेशन गैप’ की खबरें आती रहती हैं।

आगामी फेरबदल की आहट?

राजनीतिक विश्लेषकों और भाजपा सूत्रों का मानना है कि इस मार्च महीने में ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल हो सकता है।

  • राष्ट्रीय भूमिका: संभव है कि विजयवर्गीय और पटेल को संगठन में राष्ट्रीय महासचिव या किसी बड़े राज्य का प्रभारी बनाकर फिर से दिल्ली बुला लिया जाए।

  • मोहन यादव का रास्ता साफ: यदि ये दिग्गज राष्ट्रीय भूमिका में जाते हैं, तो मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए राज्य प्रशासन पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने और अपनी पसंद की टीम बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें