भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची के “SIR” (Special Intensive Revision) कार्यक्रम में बड़ी धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में हुए एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘भाजपा एजेंट’ के रूप में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मुख्य आरोप और कांग्रेस नेताओं के बयान
| नेता का नाम | प्रमुख आरोप/बात |
| दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री) | चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया; प्रक्रिया को कॉम्प्लेक्स बनाने पर आपत्ति जताई। कहा, डिजिटल एरा में वोटर लिस्ट मशीन रीडेबल होनी चाहिए और चुनाव की घोषणा के दिन ही सूची फ्रीज कर दी जानी चाहिए। |
| उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष) | सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘बीजेपी का एजेंट’ करार दिया। आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों से बैठक नहीं कर रहा और RSS से जुड़े लोगों को BLO (Booth Level Officer) बनाया जा रहा है। |
| जीतू पटवारी (प्रदेश अध्यक्ष) | इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया है। राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान का जिक्र किया। धांधली पर नजर रखने के लिए मजबूत तंत्र बनाने का दावा किया। |
| सज्जन सिंह वर्मा (पूर्व मंत्री) | जमीनी स्तर पर गड़बड़ियों का खुलासा किया: 65 हजार बूथों पर BLO तक गणना पत्रक नहीं पहुंचने और संबंधित ऐप के काम न करने का आरोप। आउटसोर्स कर्मचारियों को BLO बनाने की गाइडलाइन पर भी सवाल उठाए। |
कांग्रेस का एक्शन प्लान और हस्ताक्षर अभियान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि पार्टी ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया है:
- हस्ताक्षर अभियान: मध्य प्रदेश में अब तक 35 लाख 56 हजार 886 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटाए गए हैं।
- प्रबंधन तंत्र: SIR प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए प्रदेश को 1,047 ब्लॉक और उप-ब्लॉक में बांटा गया है, जहां हर विधानसभा में अधिवक्ता और BLA-1 व BLA-2 नियुक्त किए गए हैं।
- राष्ट्रीय प्रदर्शन: कांग्रेस ने 25 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ा प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में पार्टी के सभी सांसद और जनप्रतिनिधि जुटेंगे और इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से मांग की है कि अंतिम प्रकाशन से पहले मतदाता सूची की जांच करने का अवसर राजनीतिक दलों और मीडिया को दिया जाना चाहिए।








