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MP हाईकोर्ट में ‘हबियस कॉर्पस’ याचिका खारिज: मुस्लिम युवक ने लगाया था हिंदू सहेली को बंधक बनाने का आरोप; युवती बोली— “मैं अपने माता-पिता के साथ खुश हूँ, युवक से कोई संबंध नहीं रखना चाहती”

जबलपुर/भोपाल | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल निवासी एक युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ...

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| सतना टाइम्स

जबलपुर/भोपाल | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल निवासी एक युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता शाजिल शेख ने आरोप लगाया था कि उसकी एक हिंदू दोस्त को उसके परिजनों ने जबरन बंधक बनाकर बैतूल भेज दिया है। हालांकि, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए युवती के बयानों ने युवक के दावों की हवा निकाल दी।

मुख्य बिंदु 

  • युवती का दो टूक बयान: चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) के सामने युवती ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से माता-पिता के साथ रह रही है।

  • हाईकोर्ट की सख्ती: जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई की।

  • सादे कपड़ों में जांच: कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि मजिस्ट्रेट और महिला पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में जाकर युवती के बयान दर्ज करें, ताकि उस पर कोई दबाव न रहे।

  • याचिका का आधार: युवक ने दावा किया था कि युवती ने पहले सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की थी, जिसे दबाव डालकर बंद करवाया गया।


क्या था पूरा मामला?

भोपाल के शाजिल शेख ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी हिंदू सहेली को उसके परिवार वालों ने कैद कर रखा है और उसे बैतूल शिफ्ट कर दिया गया है। युवक ने युवती की जान को खतरा बताते हुए उसे कोर्ट में पेश करने की मांग की थी।

मजिस्ट्रेट के सामने खुली पोल

हाईकोर्ट के निर्देश पर बैतूल के सीजेएम ने युवती के बयान दर्ज किए। रिपोर्ट में सामने आया कि:

  1. कोई दबाव नहीं: युवती ने बताया कि उसके परिवार ने उसे बंधक नहीं बनाया है।

  2. रिश्ते से इनकार: युवती ने याचिकाकर्ता (शाजिल) के साथ किसी भी प्रकार का संबंध रखने से साफ मना कर दिया।

  3. स्वेच्छा से निवास: युवती ने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है और वहीं सुरक्षित है।


हाईकोर्ट का फैसला

युवती के बयानों को रिकॉर्ड पर लेने के बाद, याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें इस मामले को ‘लव जिहाद’ या ‘जबरन धर्मांतरण’ के चश्मे से देखा जा रहा था।


खबर का सारांश 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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