जबलपुर | शनिवार, 02 मई 2026 जबलपुर के बरगी डैम हादसे से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो वीरता, धैर्य और गहरे दुख का मिश्रण है। 70 वर्षीय रियाज हुसैन ने पलटे हुए क्रूज के भीतर ‘एयर पॉकेट’ के सहारे तीन घंटों तक मौत को मात दी। हालांकि, इस जंग को जीतने वाले रियाज की खुशियां अधूरी रह गईं; उन्होंने इस हादसे में अपनी पत्नी और बेटी को हमेशा के लिए खो दिया।

खबर के मुख्य अंश
-
मौत का चेंबर: क्रूज के निचले हिस्से (AC चेंबर) में फंसे थे रियाज, पानी भरते ही चारों ओर छा गया था सन्नाटा।
-
एयर पॉकेट का सहारा: एक छोटे से कोने में बची हवा (Air Pocket) के दम पर 3 घंटे तक ली सांसें।
-
रेस्क्यू का पल: अंधेरे में जहाज की दीवार पीटी, तब रेस्क्यू टीम चिल्लाई— “अंदर एक जान जिंदा है!”
-
बड़ा आरोप: यात्रियों को मरता छोड़ भाग निकला क्रूज स्टाफ; लाइफ जैकेट देने में की गई लापरवाही।
‘5 मिनट बाद सब खामोश हो गया’
रियाज हुसैन ने बताया कि जब तूफान आया, तो क्रूज अचानक पलट गया। वे निचले हिस्से में थे जहां पानी बहुत तेजी से भरा। रियाज कहते हैं, “शुरुआत में सब चीख रहे थे, जान की भीख मांग रहे थे, लेकिन 5 मिनट के भीतर सब शांत हो गया। हर तरफ बस सन्नाटा और पानी था।” खुशनसीबी रही कि उन्हें ऊपर के कोने में थोड़ी सी जगह मिली जहां हवा थी।
3 घंटे का संघर्ष और रेस्क्यू
जब बाहर रेस्क्यू टीम पहुंची, तो रियाज ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार जहाज की लोहे की चादर को पीटना शुरू किया। धातु की आवाज सुनकर टीम को एहसास हुआ कि अंदर कोई जीवित है। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला। बाहर आते ही रियाज की पहली पुकार उनकी पत्नी और बेटी के लिए थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
स्टाफ की शर्मनाक करतूत: यात्रियों को छोड़ भागे
हादसे के एक अन्य चश्मदीद एडवोकेट रोशन आनंद वर्मा ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब क्रूज डगमगाने लगा, तो चालक दल के सदस्य यात्रियों की मदद करने के बजाय खुद पानी में कूदकर भाग गए। रोशन के मुताबिक, शुरुआत में किसी को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी; उन्होंने खुद लॉकर से जैकेट निकालकर लोगों को बांटीं।
ताज़ा अपडेट:
-
मृतकों की संख्या: 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
-
बचाए गए: 28 लोग सुरक्षित हैं।
-
कार्रवाई: क्रूज स्टाफ पर हत्या के प्रयास और लापरवाही की धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग उठ रही है।








