Bhopal News :देशभर में दशहरा (विजयादशमी) पर जहां बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में लंकापति रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाता है,वहीं मध्य प्रदेश में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां इस परंपरा का पालन नहीं होता। इन जगहों पर रावण को एक विद्वान, शिव भक्त, या शक्तिशाली राजा के रूप में सम्मान दिया जाता है और उसका दहन करना अशुभ माना जाता है।

आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के ये 5 प्रमुख स्थान हैं जहाँ रावण दहन नहीं होता:
1. खानपुरा – मंदसौर
कारण: यहां रावण को विद्वान ब्राह्मण और शिवभक्त माना जाता है। इसके अलावा, कुछ परिवार स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं, जिस कारण वे उसका दहन नहीं करते हैं।
2. सिंवड़ा – दतिया
कारण: यहां की लोक मान्यता है कि रावण ज्ञानी और शिवभक्त था। इसी कारण, यहां उसकी पूजा की जाती है, दहन नहीं।
3. भाटखेड़ी – राजगढ़
कारण: इस स्थान पर रावण की स्थायी प्रतिमा स्थापित है। यहां के लोग मानते हैं कि वह एक शक्तिशाली राजा था और उसकी पूजा की जाती है। दशहरे पर, उसे मारने का अभिनय किया जाता है, लेकिन उसका पुतला जलाया नहीं जाता।
4. रावण गाँव – विदिशा (नटेरन तहसील)
कारण: इस गाँव का नाम ही रावण पर रखा गया है। यहां के लोग रावण को पूजनीय मानते हैं और उसे जलाना अशुभ मानते हैं।
5. मंडला – मंडला जिला
कारण: मंडला जिले में गोंड जनजाति रावण को अपने पूर्वजों जैसा मानती है और उसकी पूजा करती है। इस क्षेत्र में रावण दहन की कोई परंपरा नहीं है।यह अनूठी परंपराएं दर्शाती हैं कि रावण के चरित्र को भारत के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह विविध और सम्मानजनक दृष्टिकोण से भी देखा जाता है।








