धार (मध्य प्रदेश) – ‘लेपर्ड स्टेट’ के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश में तेंदुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धार जिले के मांडू क्षेत्र अंतर्गत नालछा साडपुर इलाके में इलाज मिलने से पहले ही एक बीमार तेंदुए की मौत हो गई। वन विभाग की रेस्क्यू टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही यह घटना हो गई। चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश में बीते एक महीने के भीतर यह चौथे तेंदुए की मौत का मामला है।
ग्रामीणों ने दी सूचना, पर नहीं बच सकी जान
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नालछा ब्लॉक के ग्राम सोडपुर पंचायत के नजदीक ग्रामीणों ने जंगल के पास एक बीमार तेंदुआ देखा था, जिसकी सूचना तत्काल विभाग को दी गई। वन अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर देखा कि तेंदुआ गंभीर रूप से बीमार लग रहा था।
इंदौर से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, लेकिन दोपहर करीब एक बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तब तक तेंदुए की जान जा चुकी थी।
उम्रदराज या बीमारी, पीएम रिपोर्ट से होगा खुलासा
वन विभाग के डीएफओ टी विश्वनाथन ने मीडिया को बताया कि तेंदुए के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान प्रारंभिक तौर पर नहीं मिले हैं। उन्होंने आशंका जताई कि संभवतः वह उम्रदराज होने या गंभीर बीमारी के कारण मरा होगा।
इंदौर से पहुंची रेस्क्यू और मेडिकल टीम ने तेंदुए के शरीर से सैंपल लिए हैं। डीएफओ ने स्पष्ट किया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ पाएगा।
एक महीने में चार मौतें: शिकार, हादसे और बीमारी
मध्य प्रदेश में तेंदुओं की लगातार मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। बीते एक महीने में चार तेंदुओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं:
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सागर जिले में: हाईवे पर किसी वाहन की टक्कर से एक मादा तेंदुआ की मौत हो गई थी।
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जबलपुर में: दो तेंदुओं की मौत की जानकारी सामने आई थी।
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धार में: नालछा क्षेत्र में यह बीमार तेंदुए की मौत का नया मामला है।
इससे पहले भी तेंदुओं की मौतें कभी शिकार, कभी सड़क हादसे, तो कभी बीमारी के चलते होती रही हैं। हाल ही में इंदौर क्षेत्र में एक मादा तेंदुए को खेत की बाड़ से रेस्क्यू कर चिड़ियाघर पहुंचाया गया था, जिसके बाद उसके दो शावकों को भी उसी जगह से बचाया गया था।








