सागर (मध्य प्रदेश): टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक नर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। प्रदेश के सबसे नए और क्षेत्रफल में सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की सीमा से महज 2 किलोमीटर दूर राजस्व वन क्षेत्र में एक 5-6 साल के स्वस्थ बाघ का शव बरामद हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बाघ के शरीर पर चोट या शिकार के कोई निशान नहीं मिले हैं।
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हिलगन के जंगल में मिला शव
घटना दक्षिण वनमंडल के ढाना रेंज की है। रविवार को ग्रामीणों ने हिलगन के जंगल में बाघ को मृत अवस्था में देखा, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।
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प्राथमिक जांच: दक्षिण वन मंडल के डीएफओ (DFO) वरुण यादव ने टीम के साथ मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए।
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अंग सुरक्षित: बाघ के नाखून, खाल और अन्य सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिससे प्रथम दृष्टया अवैध शिकार (Poaching) की आशंका को खारिज किया जा रहा है।
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मौत का समय: विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाघ की मौत करीब 12 से 24 घंटे पहले हुई है।
बाघ गणना के बीच बड़ी क्षति
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पूरे मध्य प्रदेश में बाघों की गणना (Tiger Census) का कार्य चल रहा है।
“बाघ संभवतः अपनी टेरिटरी (इलाके) से भटककर राजस्व क्षेत्र में आ गया होगा। मौके पर डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने बारीकी से जांच की है, लेकिन करंट लगने या संघर्ष के कोई संकेत नहीं मिले हैं।” – वरुण यादव, डीएफओ
क्या हो सकती है मौत की वजह?
चूंकि शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं है, इसलिए विभाग अब पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। मौत के संभावित कारणों में निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की जा रही है:
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आंतरिक बीमारी: क्या बाघ किसी गंभीर संक्रमण या बीमारी का शिकार था?
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जहरीला भोजन: क्या उसने किसी ऐसे जानवर का शिकार किया जिसे जहर दिया गया था?
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प्राकृतिक कारण: उम्र या अचानक हृदय गति रुकने जैसी संभावनाएं।
सुरक्षा पर सवाल
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग दो दर्जन तक पहुँच गई है। ऐसे में टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे राजस्व क्षेत्रों में बाघों की सुरक्षा और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं।








