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खरगोन बना ‘पश्चिमी भारत का आइकन’: कलेक्टर भव्या मित्तल को मिला राष्ट्रीय जल पुरस्कार, 4.21 लाख जल संरचनाओं से दोगुनी की जल संचयन क्षमता

खरगोन (मध्य प्रदेश)। जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में खरगोन जिले को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले को पश्चिमी क्षेत्र ...

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| सतना टाइम्स

खरगोन (मध्य प्रदेश)। जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में खरगोन जिले को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले को पश्चिमी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित करते हुए, यहां की कलेक्टर भव्या मित्तल (IAS) को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में कलेक्टर मित्तल को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

खरगोन की उपलब्धि: जल संरक्षण का मॉडल

कलेक्टर भव्या मित्तल के नेतृत्व में खरगोन जिले ने जल संरक्षण में अभूतपूर्व कार्य किया है, जिसकी विशेषज्ञ भी तारीफ कर रहे हैं:

उपलब्धि विवरण
जल संरचनाएं 4,21,182 कृत्रिम जलभरण संरचनाएं (काउंटर ट्रेंच, चेक डैम, गली प्लग आदि) बनाई गईं।
जल संचयन क्षमता जिले में कुल 2.31 करोड़ घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ी है।
पुरस्कार श्रेणी पश्चिमी क्षेत्र, श्रेणी 3 के तहत 13वां स्थान और 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि।
नदी सुधार नर्मदा, नानी, वंशावली, और बोराड़ नदियों के किनारे की 8000 हेक्टेयर खराब जमीन को स्टॉप डैम और चेक डैम से सुधारा गया।
भूजल स्तर छोटी नदियां जो दिसंबर तक सूख जाती थीं, अब अप्रैल तक बह रही हैं।

कुंदा नदी का जीर्णोद्धार और निधिवन का निर्माण

जल संरक्षण के साथ-साथ नदी जीर्णोद्धार पर भी खरगोन ने उत्कृष्ट काम किया है:

  • अवैध कब्जे हटे: कुंदा नदी के आसपास 627 जगहों से अवैध कब्जे हटाए गए।

  • पर्यटन स्थल: खाली हुई 106 एकड़ जमीन पर ‘निधिवन’ नाम का एक पर्यटन स्थल बनाया गया है।

  • पुरानी बावड़ी: जिले की 45 पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया।

केंद्र की योजनाओं में भी अग्रणी

खरगोन ने केंद्र सरकार की योजनाओं का भी प्रभावी ढंग से उपयोग किया है:

  • अमृत सरोवर: 156 नए अमृत सरोवर बनाए गए।

  • सिंचाई का विस्तार: सूक्ष्म सिंचाई के तहत 48,975 हेक्टेयर जमीन आती थी, जिसमें इस साल 3,290 हेक्टेयर नई जमीन जोड़ी गई, जिससे 37,042 किसानों को लाभ हुआ।

  • सीईओ को सम्मान: जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह को भी ‘जल संचय जनभागीदारी 1.0’ के तहत उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।

पर्यावरण और जन जागरूकता अभियान

जिले में बड़े पैमाने पर जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण कार्य भी हुए:

  • वृक्षारोपण: 5400 हेक्टेयर जमीन पर 30 लाख पेड़ लगाए गए, जिनमें 95 प्रतिशत जीवित हैं। मनरेगा और निजी बागों में लाखों पौधे लगाए गए।

  • जल प्रबंधन: गंदे पानी को फिर से इस्तेमाल करने के लिए 15 इकाइयां और 4 मलजल उपचार संयंत्र चालू किए गए।

  • जागरूकता: जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए 2,277 सफाई अभियान, 605 कार्यशालाएं, 200 ग्राम पंचायतों में कलश यात्रा और 147 जल चौपाल का आयोजन किया गया।

सभी कार्यों की जियो-टैगिंग

‘जल संचय जनभागीदारी 1.0’ अभियान के तहत, 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक 5606 जल संरक्षण के काम पूरे किए जा चुके हैं और उनकी जियो-टैगिंग करके पोर्टल पर जांच भी की गई है, जिससे कार्य में पारदर्शिता बनी रही।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें