इंदौर (मध्य प्रदेश): इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी (नर्मदा लाइन में सीवेज मिक्सिंग) के कारण फैला डायरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों में 20 नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। हालात को बेकाबू होता देख केंद्र सरकार के निर्देश पर कोलकाता से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इंदौर पहुँच चुकी है।
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कोलकाता से आई NIRBI की टीम करेगी जांच
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (NIRBI), कोलकाता की टीम इंदौर पहुँच गई है।
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तकनीकी सहायता: ICMR से संबद्ध यह टीम पानी में मौजूद बैक्टीरिया के प्रकार और संक्रमण फैलने के सटीक कारणों की वैज्ञानिक जांच करेगी।
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विशेषज्ञता: यह टीम महामारी नियंत्रण और बैक्टीरियल इंफेक्शन को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
आंकड़ों में तबाही: मौत की संख्या पर विवाद
जहाँ प्रशासन मौतों के आंकड़े सीमित बता रहा है, वहीं स्थानीय दावे डराने वाले हैं:
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सरकारी आंकड़ा: प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।
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महापौर का बयान: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले 10 मौतों की जानकारी होने की बात कही थी।
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जनता का दावा: स्थानीय निवासियों के अनुसार, अब तक 16 से 17 लोग (6 महीने के मासूम सहित) अपनी जान गंवा चुके हैं।
अस्पतालों का हाल: 11 मरीज अब भी ICU में
अब तक कुल 398 मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। राहत की बात यह है कि 256 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है, लेकिन 142 मरीज अब भी उपचाराधीन हैं। इनमें से 11 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू (ICU) में लाइफ सपोर्ट पर हैं।
ग्राउंड जीरो पर एक्शन: 32 सेक्टर में बंटा इलाका
प्रशासन ने भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा लाइन की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी है और क्षेत्र को 32 सेक्टर में विभाजित किया है:
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टैंकों की सफाई: एक्सपर्ट्स की निगरानी में हर घर के स्टोरेज टैंक को खाली कराकर उनकी वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जा रही है।
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क्लोरीनेशन: सफाई के बाद क्लोरीन की मदद से पानी को इस्तेमाल योग्य बनाया जा रहा है।
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मेगा सर्वे: स्वास्थ्य टीमों ने अब तक 9,416 लोगों का डोर-टू-डोर सर्वे और स्वास्थ्य परीक्षण किया है।
निष्कर्ष
इंदौर जैसे विकसित शहर में इस तरह की त्रासदी ने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग लगा दिया है। फिलहाल पूरा ध्यान नए मरीजों को रोकने और गंभीर मरीजों की जान बचाने पर है।








