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INDORE GST SCAM: लोहा मंडी में ‘पेपर ट्रेडिंग’ का बड़ा खुलासा; 100 करोड़ का फर्जी बिल घोटाला, मास्टरमाइंड अकाउंटेंट के सिंडिकेट ने ऐसे लगाया चूना

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने कर चोरी के एक ऐसे खेल का पर्दाफाश किया है, ...

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| सतना टाइम्स

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने कर चोरी के एक ऐसे खेल का पर्दाफाश किया है, जहाँ माल का नहीं बल्कि सिर्फ कागजों (बिल) का लेन-देन हो रहा था। इस ‘पेपर ट्रेडिंग’ के जरिए सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया है। इंदौर की लोहा मंडी से लेकर पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैले इस रैकेट में लोहा व्यापारी और कबाड़ियों (Scrap Dealers) की मिलीभगत सामने आई है।

क्या है ‘पेपर ट्रेडिंग’ का खेल?

यह घोटाला दो स्तरों पर काम कर रहा था:

  • नकद में असली माल: लोहा व्यापारी अपनी कीमती जीआई शीट्स (GI Sheets) और अन्य माल बिना किसी बिल के ‘नकद’ में बाजार में बेच देते थे।

  • कागजों पर ‘कचरा’: अब स्टॉक रजिस्टर से उस माल को हटाने के लिए व्यापारी अपने रिकॉर्ड में ‘आइटम कोड’ बदलकर उसे आयरन स्क्रैप (लोहे का कबाड़) दिखा देते थे।

  • बिल की बिक्री: इसके बाद, व्यापारी इन फर्जी बिलों को कबाड़ियों को 5 से 6 प्रतिशत कमीशन पर बेच देते थे। कबाड़ी इन बिलों का इस्तेमाल अपने अवैध (बिना बिल वाले) स्क्रैप को ‘पक्का’ दिखाने और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने के लिए करते थे।

 मास्टरमाइंड: एक ‘कॉमन’ अकाउंटेंट

जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का दिमाग एक ही अकाउंटेंट है। यह अकाउंटेंट लोहा व्यापारियों और कबाड़ियों, दोनों के बही-खाते (Accounts) देखता था। इसी ने व्यापारियों को सिखाया कि कैसे माल को अंडरग्राउंड बेचकर कागजों पर उसे स्क्रैप में बदला जाए।

‘कच्ची पर्चियों’ और डायरी ने उगले राज

जीएसटी इंटेलिजेंस की छापेमारी में अधिकारियों के हाथ एक सीक्रेट डायरी और भारी मात्रा में कच्ची पर्चियाँ लगी हैं:

  • बड़े नाम शामिल: डायरी में इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन के कुछ रसूखदार पदाधिकारियों और पीथमपुर की फर्मों के नाम दर्ज हैं।

  • 100+ व्यापारी रडार पर: छापेमारी में मिले दस्तावेजों में 100 से अधिक ऐसे व्यापारियों के नाम हैं जो इस फर्जी ई-वे बिल सिंडिकेट का हिस्सा थे।

गिरफ्तारी की तलवार

जीएसटी कानून के मुताबिक, यदि टैक्स चोरी का आंकड़ा 5 करोड़ रुपये से अधिक होता है, तो आरोपी की बिना वारंट गिरफ्तारी का प्रावधान है। DGGI अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जहाँ फर्जी ई-वे बिल जेनरेट कर परिवहन (Transport) का झूठा दिखावा किया गया था।


घोटाले का तरीका: एक नज़र में 

  1. माल की बिक्री: असली लोहा नकद में बेचा गया (बिना बिल)।

  2. रिकॉर्ड में बदलाव: कोड बदलकर कीमती लोहे को ‘कबाड़’ (Scrap) दिखाया गया।

  3. फर्जी बिलिंग: कबाड़ियों को फर्जी बिल बेचे गए।

  4. टैक्स चोरी: सरकार से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम किया गया।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें