सतना में भ्रष्टाचार पर प्रहार: पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के लिए मांगी थी 20 हजार की घूस, रंगे हाथों पकड़े जाने पर उड़े होश
प्रमुख घटनाक्रम
मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त का अभियान जारी है। गुरुवार को सतना जिले की रामपुर बाघेलान तहसील में उस वक्त हड़कंप मच गया जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह जायसूर को उनके ही चैंबर में 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

साहब बड़े आराम से अपनी सरकारी कुर्सी पर बैठकर “ऊपर की कमाई” वसूल रहे थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि नोटों के साथ उनकी हथकड़ी भी इंतजार कर रही है।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता आशुतोष सिंह (निवासी सतना) के अनुसार, मामला उनकी पुश्तैनी जमीन के बंटवारे और नामांतरण से जुड़ा था:
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काम: पिता चंद्रशेखर सिंह के नाम दर्ज जमीन का बंटवारा और आदेश पारित करना।
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सौदा: इस काम के बदले नायब तहसीलदार ने कुल 20,000 रुपये की मांग की थी।
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पहली किस्त: हैरानी की बात यह है कि 15 दिसंबर को शिकायत के सत्यापन के दौरान ही तहसीलदार साहब 10,000 रुपये पहले ही ले चुके थे।
जाल ऐसे बिछाया गया
लोकायुक्त डीएसपी के नेतृत्व में इस ‘ट्रैप’ की पटकथा 15 दिसंबर को ही लिख दी गई थी।
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गुरुवार (18 दिसंबर): योजना के मुताबिक, आशुतोष बाकी बचे 10,000 रुपये लेकर तहसील कार्यालय पहुंचे।
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रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही नायब तहसीलदार ने रिश्वत के पैसे हाथ में लिए, वहां सिविल ड्रेस में पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उन्हें दबोच लिया।
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उड़े होश: टीम को देखते ही तहसीलदार के चेहरे का रंग उड़ गया। लोकायुक्त ने हाथ धुलवाकर नोट जब्त किए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
तहसील में मचा हड़कंप
कार्रवाई के दौरान पूरे तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का यूं घूस लेते पकड़ा जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले का सारांश
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | रामपुर बाघेलान तहसील, सतना |
| आरोपी | वीरेंद्र सिंह जायसूर (नायब तहसीलदार) |
| रिश्वत की राशि | 10,000 (मौके पर) + 10,000 (पहले लिए) |
| कार्रवाई | रीवा लोकायुक्त द्वारा ट्रैप |
| वजह | जमीन बंटवारा/नामांतरण |








