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धार: वेतन नहीं तो काम नहीं! सफाई कर्मियों ने नगर परिषद कार्यालय पर जड़ा ताला; 9 महीने से अटकी पगार, बच्चों की स्कूल फीस तक के पैसे नहीं

धरमपुरी (धार): मध्य प्रदेश के धार जिले के धरमपुरी में नगर परिषद और सफाई कर्मचारियों के बीच विवाद चरम पर पहुँच गया ...

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| सतना टाइम्स

धरमपुरी (धार): मध्य प्रदेश के धार जिले के धरमपुरी में नगर परिषद और सफाई कर्मचारियों के बीच विवाद चरम पर पहुँच गया है। सोमवार को वेतन भुगतान की मांग को लेकर दर्जनों सफाई कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का आरोप है कि करीब 9 महीनों से उन्हें मेहनत का पैसा नहीं मिला है, जिससे उनके घर के चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है।

Dharampuri Nagar Parishad

वेतन का गणित और गायब होती राशि

कर्मचारियों ने एक गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि:

  • सरकारी बजट: सरकार हर महीने वेतन के मद में 24 लाख रुपये भेजती है।

  • भुगतान का संकट: कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें वेतन के रूप में केवल 9 से 10 लाख रुपये ही मिल पा रहे हैं। बाकी की राशि का उपयोग कहाँ किया जा रहा है, इसका कोई हिसाब नहीं है।

आर्थिक दलदल में फंसे कर्मचारी

8-9 महीने से वेतन न मिलने का असर अब कर्मचारियों के निजी जीवन पर बुरी तरह पड़ रहा है:

  1. शिक्षा पर संकट: कई कर्मचारियों ने बताया कि वे अपने बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर पा रहे हैं।

  2. कानूनी पचड़े: बैंकों से लिए गए ऋण की किस्तें (EMI) न चुका पाने के कारण चेक बाउंस हो रहे हैं। कोर्ट से वारंट जारी हो रहे हैं और कर्मचारियों को अपनी जमानत के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

  3. कर्ज का बोझ: स्थानीय दुकानदारों और साहूकारों का दबाव इतना बढ़ गया है कि कर्मचारियों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।

प्रशासनिक जवाब: “पैसे नहीं हैं”

हंगामा बढ़ने पर धरमपुरी पुलिस ने मौके पर पहुँचकर किसी तरह कार्यालय का ताला खुलवाया। नगर परिषद के सीएमओ बलराम भूरे ने अपनी सफाई में कहा:

  • विद्युत बिल की कटौती: सरकार से मिलने वाले चुंगी के पैसे में से विद्युत विभाग अपना पुराना बकाया बिल काट लेता है, जिससे परिषद के पास नगदी की कमी हो गई है।

  • आश्वासन: उन्होंने वादा किया कि जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, सबसे पहले कर्मचारियों का बकाया चुकाया जाएगा।

निष्कर्ष

सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके खातों में वेतन नहीं पहुँचा, तो वे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप कर देंगे। एक तरफ प्रदेश ‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ में नंबर-1 आने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता दूतों को पगार के लिए दफ्तरों पर ताले जड़ने पड़ रहे हैं।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें