रतलाम: मध्य प्रदेश के प्रभारी मंत्री और जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह का रतलाम दौरा कई कारणों से सुर्खियों में रहा। कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में उनका लाडली बहना योजना को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया, वहीं अधिकारियों की घोर लापरवाही पर उनका गुस्सा भी खुलकर सामने आया।
लाडली बहनों की उपस्थिति पर मंत्री का विवादास्पद बयान
मंत्री विजय शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दो साल पूरे होने पर आयोजित होने वाले सम्मान कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए:
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उपस्थिति का लक्ष्य: मंत्री ने अधिकारियों को सुनिश्चित करने को कहा कि रतलाम जिले की करीब ढाई लाख लाडली बहनों में से कम से कम 50,000 बहनें कार्यक्रम में आएं।
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प्रोत्साहन: उन्होंने कहा कि सरकार हर बहन को प्रतिमाह ₹1,500 दे रही है (यानी करोड़ों रुपये खातों में जा रहे हैं), इसलिए मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम में उनका आना सम्मान की बात होगी। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि जो बहनें आएंगी, उन्हें ₹250 अतिरिक्त देने की व्यवस्था की जाए।
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जांच का निर्देश: सबसे ज़्यादा चर्चा उनके इस बयान पर हुई कि जो बहनें कार्यक्रम में नहीं आएंगी, उनकी जांच कराई जाए। मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उनका आधार लिंक न हो या किसी तकनीकी कारण से वे योजना का लाभ नहीं ले पा रही हों।
अक्षय ऊर्जा विभाग की चूक पर भड़के मंत्री
बैठक में अधिकारियों की घोर अनुशासनहीनता को देखकर मंत्री विजय शाह भड़क उठे।
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लापरवाही: अक्षय ऊर्जा विभाग की ओर से विभाग प्रमुख की जगह एक मैकेनिक को प्रजेंटेशन देने के लिए भेज दिया गया था।
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हंगामा: जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने जब मैकेनिक से उसका पद पूछा और पूरी बात सामने आई, तो उन्होंने इसे बैठक का अपमान बताते हुए हंगामा किया।
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मंत्री का गुस्सा: मंत्री शाह ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता और प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मंत्री और विधायक के मौजूद होने पर विभाग प्रमुखों का न आना गलत है।
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कार्रवाई: मंत्री ने मैकेनिक संतोष तंवर को सख्त लहजे में बैठक से बाहर जाने को कहा। हालांकि, बाद में उन्होंने उसे पास बुलाकर हाथ मिलाया और धन्यवाद देते हुए बाहर भेजा।
सीएम और चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखने के निर्देश
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जवाबदेही: डॉ. विजय शाह ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए अपने पीए को मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेटरी और कमिश्नर को पत्र लिखकर इसकी सूचना देने के निर्देश दिए।
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सख्त चेतावनी: उन्होंने कहा कि जानबूझकर विभाग प्रमुखों को बैठक से दूर रखना गलत संदेश देता है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।









