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नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव : सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री

Nepal PM Sushila Karki :नेपाल की राजनीति ने शुक्रवार को नया इतिहास रच दिया। देश की पूर्व चीफ जस्टिस और जानी-मानी जज ...

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Published on:

| सतना टाइम्स

नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव : सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री

Nepal PM Sushila Karki :नेपाल की राजनीति ने शुक्रवार को नया इतिहास रच दिया। देश की पूर्व चीफ जस्टिस और जानी-मानी जज सुशीला कार्की को नेपाल की नई प्रधानमंत्री चुना गया है। 73 वर्षीय कार्की के नाम के ऐलान के साथ ही नेपाल को पहली महिला प्रधानमंत्री मिली है।

नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव : सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री

यह फैसला तब सामने आया जब युवाओं के बड़े समूह ने पारंपरिक नेताओं और गठबंधन सरकार को भ्रष्ट बताते हुए खारिज कर दिया। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़की यह लहर धीरे-धीरे जनांदोलन का रूप ले गई। अंततः राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, नेपाली सेना और युवाओं के प्रतिनिधियों ने मिलकर सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने पर सहमति जताई।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की छवि

सुशीला कार्की पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। वह नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही हैं (जुलाई 2016–जून 2017)। उनकी पहचान एक सख्त और ईमानदार जज के तौर पर है, खासकर भ्रष्टाचार के मामलों में। यही वजह है कि युवा पीढ़ी उन्हें “साफ-सुथरी राजनीति” की उम्मीद के तौर पर देख रही है।प्रधानमंत्री बनने के बाद कार्की ने स्पष्ट कहा है कि उनका उद्देश्य अगले 6 महीने से 1 साल के भीतर चुनाव कराना है।

आंदोलन से सत्ता तक

कार्की ने केपी शर्मा ओली की जगह ली है, जिन्होंने हालिया हिंसक प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद उपजा गुस्सा काठमांडू और आसपास बड़े जनआंदोलन में बदल गया। इस दौरान 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए। हालांकि अब हालात नियंत्रण में हैं।

शिक्षा और करियर

7 जून 1952 को बिराटनगर (भारत-नेपाल बॉर्डर के पास) जन्मीं सुशीला कार्की सात भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं।

  • 1972: महेंद्र मोरंग कैंपस से बीए
  • 1975: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में एमए
  • 1978: त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, नेपाल से लॉ की पढ़ाई
  • 1979: वकालत की शुरुआत
  • 2007: सीनियर एडवोकेट का दर्जा
  • 2009: सुप्रीम कोर्ट की एड-हॉक जज
  • 2010: परमानेंट जज
  • 2016–17: पहली महिला चीफ जस्टिस

उन पर कार्यकाल के दौरान कई बार विवादों और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा, यहाँ तक कि महाभियोग लाने की कोशिश भी हुई, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। आज भी वह नेपाल की सिविल सोसायटी में सक्रिय हैं।

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