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राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र पर लटकी तलवार: हाईकोर्ट सख्त; हाई लेवल कमेटी को 30 जून तक फैसला सुनाने का अल्टीमेटम

जबलपुर/सतना |मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और सतना जिले की रैगांव (SC सुरक्षित) सीट से विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की ...

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| सतना टाइम्स

जबलपुर/सतना |मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और सतना जिले की रैगांव (SC सुरक्षित) सीट से विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता अब उच्च स्तरीय जांच के घेरे में है। जबलपुर हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने इस मामले में ‘हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी’ को समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य बिंदु 

  • डेडलाइन तय: हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को 30 जून 2026 तक अपना अंतिम फैसला देना होगा।

  • गंभीर आरोप: याचिकाकर्ता का दावा है कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से नहीं आती हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र का सहारा लिया।

  • दोबारा याचिका की छूट: यदि कमेटी निर्धारित समय में आदेश जारी नहीं करती है, तो याचिकाकर्ता को दोबारा कोर्ट आने की स्वतंत्रता दी गई है।

  • पक्ष रखने का मौका: कमेटी नियमानुसार राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान करेगी।


क्या है पूरा विवाद?

यह याचिका कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर की गई थी।

  1. आरक्षित सीट का मामला: रैगांव विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रतिमा बागरी ने यहाँ से जीत हासिल की थी।

  2. दावा: याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से एससी वर्ग का प्रमाण-पत्र हासिल कर चुनाव लड़ा, जो कि संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।

सरकार की सहमति और कोर्ट का आदेश

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सहमति जताई गई कि हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी अगले 60 दिनों के भीतर इस पर फैसला ले लेगी।

  • हाईकोर्ट की टिप्पणी: युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि 30 जून तक आदेश पारित होना अनिवार्य है। इस आदेश के साथ ही कोर्ट ने फिलहाल याचिका का निराकरण कर दिया है, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट पर ही अब मंत्री जी का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है।


सियासी गलियारों में हलचल

सतना जिले की राजनीति के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील मामला है। यदि कमेटी का फैसला प्रतिमा बागरी के खिलाफ आता है, तो न केवल उनकी मंत्री की कुर्सी जा सकती है, बल्कि उनकी विधायकी पर भी संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें 30 जून की डेडलाइन पर टिकी हैं।


खबर का सारांश 

  • व्यक्तित्व: प्रतिमा बागरी (राज्यमंत्री, म.प्र. शासन)।

  • क्षेत्र: रैगांव विधानसभा, जिला सतना।

  • अदालत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर।

  • समय सीमा: 30 जून 2026।

  • मुद्दा: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने का आरोप।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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