मंदसौर: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ के एक 12वीं के टॉपर छात्र को चलती बस से उतारकर ड्रग तस्करी के फर्जी मामले में आरोपी बनाए जाने की सुनवाई बुधवार (10 दिसंबर) को इंदौर हाईकोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान, मंदसौर के पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद मीणा कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस की कार्रवाई नियमानुसार नहीं थी।
एसपी ने स्वीकारी पुलिस की चूक
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याचिका: यह मामला तब चर्चा में आया जब सोहनलाल नामक व्यक्ति की ओर से याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने छात्र को बस से अवैध तरीके से उतारकर किडनैप किया और बाद में $2.7$ किलो अफीम बरामद दिखाकर झूठा केस दर्ज किया।
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कोर्ट में उपस्थिति: कोर्ट के आदेश पर एसपी विनोद मीणा बुधवार को हाईकोर्ट में पेश हुए।
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एसपी का बयान: एसपी मीणा ने कोर्ट में स्वीकार किया कि मल्हारगढ़ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई अवैधानिक थी और जांच प्रक्रिया नियमानुसार नहीं की गई थी।
कोर्ट ने उठाया सवाल
कोर्ट ने पुलिस के विरोधाभासी बयानों पर सवाल उठाया:
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पुलिस ने पहले दावा किया था कि बस में चढ़ने वाले व्यक्तियों को वे नहीं जानते थे।
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इसके विपरीत, एसपी विनोद मीणा ने स्वीकार किया कि बस में सवार वे सभी व्यक्ति पुलिसकर्मी ही थे और कार्रवाई का नेतृत्व मल्हारगढ़ के हेड कॉन्स्टेबल कर रहे थे।
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
एसपी मीणा ने अदालत को बताया कि इस मामले में संबंधित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने जांच सूची भी कोर्ट में प्रस्तुत की।
उच्च न्यायालय ने पीड़ित पक्ष और एसपी मीणा के बयानों को दर्ज करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई की तारीख घोषित नहीं की है।









