अशोकनगर (मध्य प्रदेश):नारायणपुर निवासी शिशुपाल अहिरवार अपनी पत्नी राजमाता को प्रसव के लिए सुबह 6 बजे जिला अस्पताल लाए थे। लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने इलाज में संवेदनशीलता दिखाने के बजाय कागजी खानापूर्ति और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
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1. कोरे कागज पर साइन और रेफर का दबाव
पीड़िता के पति शिशुपाल का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उसे डराया कि केस बहुत बिगड़ा हुआ है।
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दावा: स्टाफ ने कहा कि नॉर्मल डिलीवरी होना नामुमकिन है, इसलिए तुरंत भोपाल ले जाओ।
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जालसाजी: पति ने आरोप लगाया कि उससे एक कोरे कागज पर दस्तखत कराए गए और फाइल पर ‘हाई रिस्क’ का कोई आधिकारिक जिक्र तक नहीं किया गया।
2. गैलरी में प्रसव: तिरपाल बनी दीवार
दोपहर करीब 1:12 बजे जब महिला लेबर रूम से बाहर आ रही थी, तभी उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई।
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मजबूरी: अस्पताल के भीतर कोई मदद न मिलने पर साथ आई महिलाओं ने आनन-फानन में एक तिरपाल निकाला और चारों ओर से पर्दा किया।
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परिणाम: जिस केस को ‘हाई रिस्क’ बताया गया था, उसी महिला ने गैलरी में फर्श पर अपनी 5वीं संतान (बेटे) को नॉर्मल तरीके से जन्म दिया। इस दौरान अस्पताल की गैलरी खून से सन गई।
3. घटना के बाद स्टाफ की अफरा-तफरी
बच्चे के जन्म और शोर मचने के बाद अस्पताल स्टाफ की नींद खुली:
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नर्स की दौड़: प्रसव के बाद स्टाफ ने आनन-फानन में महिला को व्हीलचेयर पर बैठाया। सोशल मीडिया पर वायरल चर्चाओं के अनुसार, एक नर्स नवजात को हाथ में लेकर दौड़ते हुए अंदर ले गई।
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साक्ष्यों की सफाई: मामले को दबाने के लिए अस्पताल परिसर में फैले खून को तुरंत साफ कराया गया।
लापरवाही के मुख्य बिंदु: एक नजर में
| घटना का पहलू | विवरण |
| मरीज का नाम | राजमाता (निवासी: नारायणपुर) |
| स्टाफ का दावा | हाई रिस्क केस, नॉर्मल डिलीवरी असंभव। |
| हकीकत | अस्पताल की गैलरी में तिरपाल की आड़ में नॉर्मल डिलीवरी। |
| गंभीर आरोप | कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराना और रेफर की धमकी। |
| प्रबंधन की प्रतिक्रिया | आनन-फानन में साक्ष्य (खून) मिटाने की कोशिश। |








