जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। कुंडम थाना अंतर्गत हरदुली आदिवासी छात्रावास में दूषित भोजन करने से एक 14 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। अब फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि छात्र की जान ‘जहरीले और दूषित’ खाने की वजह से ही गई थी।
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घटना का घटनाक्रम: लापरवाही की इंतेहा
यह दुखद घटना बीते 18 अगस्त की है, जब छात्रावास में भोजन करने के बाद लगभग एक दर्जन छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हॉस्टल प्रबंधन की घोर लापरवाही का आलम यह था कि बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने के बजाय पास के ही एक कथित डॉक्टर (झोलाछाप) से इलाज करवाकर उन्हें घर भेज दिया गया।
रास्ते में तोड़ा दम
कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र राजकुमार धुर्वे (14 वर्ष) की हालत घर पहुँचने पर और ज्यादा खराब हो गई। परिजनों ने उसे तत्काल कुंडम अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ से उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही मासूम ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
FSL रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
पुलिस ने मौत के कारणों का पता लगाने के लिए छात्र का विसरा (Viscera) सुरक्षित कर रीजनल फॉरेंसिक लैब (RFSL) भेजा था। लैब की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि छात्र की मृत्यु ‘दूषित भोजन’ के सेवन के कारण हुई थी। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
डीएसपी आकांक्षा उपाध्याय के अनुसार, मर्ग जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने छात्रावास अधीक्षक गजेंद्र झारिया के खिलाफ धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) और 125 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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वर्तमान स्थिति: आरोपी अधीक्षक फिलहाल फरार है।
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पुलिस कार्रवाई: पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल?
इस घटना ने आदिवासी छात्रावासों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और प्रबंधन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीमार बच्चों को उचित डॉक्टरी सहायता न दिलाना और उन्हें घर भेज देना प्रशासन की बड़ी चूक मानी जा रही है।








