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पिता रोए फफक-फफक, CM मोहन यादव ने दिया शहीद को कांधा: हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई; भाई को SI पद पर नौकरी और ₹1 करोड़ की घोषणा

नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए मध्य प्रदेश के लाल, हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की ...

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| सतना टाइम्स

नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए मध्य प्रदेश के लाल, हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की पार्थिव देह जब तिरंगे में लिपटी उनके गृह ग्राम बोहानी, नरसिंहपुर पहुंची, तो पूरा शहर अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा। शहीद को श्रद्धांजलि देने खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोहानी पहुंचे। उन्होंने शहीद की अर्थी को कंधा दिया और शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया।

 भावुक पल: सीएम के कांधे पर सिर रखकर रोए शहीद के भाई

अंतिम संस्कार के दौरान अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिले।

  • पिता का रुदन: बेटे को तिरंगे में लिपटे देखकर शहीद आशीष शर्मा के बुजुर्ग पिता देवेंद्र शर्मा फफक-फफक कर रोए। घर में मां का रुदन हर किसी के दिल को झकझोर रहा था।

  • सीएम का साथ: मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने बोहानी पहुंचकर शहीद की अर्थी को कंधा दिया।

  • भाई का दुःख: सीएम के कांधे पर सिर रखकर रोते हुए शहीद के भाई को सीएम ने गले लगाया और भरोसा दिलाया कि शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा।

सीएम ने की बड़ी घोषणाएं

शहीद आशीष शर्मा के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं:

  • आर्थिक सहायता: शहीद परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि प्रदान की जाएगी।

  • नौकरी: शहीद के छोटे भाई को सब-इंस्पेक्टर (एसआई) के पद पर सीधी नियुक्ति दी जाएगी।

  • स्मृति: शहीद आशीष शर्मा के शौर्य और बलिदान की गौरवगाथा को स्मरणीय बनाए रखने के लिए गांव में एक पार्क और एक स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा, जिसका नाम शहीद के नाम पर होगा।

सबसे आगे थे आशीष, मिली थी दो बार वीरता

शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा अपनी ड्यूटी के प्रति बेहद निडर और साहसी थे।

  • नेतृत्व: महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान वह टीम को लीड कर रहे थे और सबसे आगे थे।

  • चोटें: नक्सलियों से एनकाउंटर के दौरान उनके पेट, सीने और पैर में गोली लगी थी।

  • सम्मान: उन्हें पूर्व में उनके अदम्य साहस और वीरता के लिए दो बार वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका था।

बोहानी सिहोरा में जब राजकीय सम्मान के साथ पार्थिव देह पहुंची, तो हर घर से लोग शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए और पूरे नगर में फूल बरसाए गए।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें