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EXPOSE: सीएम के वादे के बाद भी बदहाली! सीधी की अनामिका बैगा का छलका दर्द— ‘भोपाल में खाने को तरसी, न लैपटॉप मिला न मोबाइल’

सीधी/भोपाल। दो महीने पहले मुख्यमंत्री के सामने रोकर अपनी पढ़ाई के लिए मदद मांगने वाली अनामिका बैगा एक बार फिर चर्चा में ...

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| सतना टाइम्स

सीधी/भोपाल। दो महीने पहले मुख्यमंत्री के सामने रोकर अपनी पढ़ाई के लिए मदद मांगने वाली अनामिका बैगा एक बार फिर चर्चा में है। नीट (NEET) की तैयारी के लिए सरकारी खर्च पर भोपाल भेजी गई अनामिका का आरोप है कि वहां उसे बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची छात्रा ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के सामने अपनी आपबीती सुनाई।

“दो-दो दिन तक भूखी रही, दूसरों से मांगे कंबल”

अनामिका ने कोचिंग संस्थान और वहां की व्यवस्थाओं पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • भोजन का संकट: छात्रा का दावा है कि भोपाल के ज्ञान शिखर कोचिंग सेंटर में उसे कई बार दो से तीन दिनों तक भोजन के लिए तरसना पड़ा।

  • ठंड में बेहाली: कड़ाके की ठंड के दौरान उसे ओढ़ने के लिए पर्याप्त साधन नहीं दिए गए, जिसके कारण उसे दूसरे छात्रों से कंबल मांगकर रात गुजारनी पड़ी।

  • सुविधाओं का अभाव: पढ़ाई का माहौल न होने के कारण उसकी नीट की तैयारी पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

सीएम के वादे: लैपटॉप और मोबाइल का इंतज़ार

अनामिका के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उसे पढ़ाई के लिए लैपटॉप और मोबाइल देने का व्यक्तिगत आश्वासन दिया था।

  • अधूरा वादा: छात्रा का कहना है कि प्रशासन ने अब तक उसे ये उपकरण उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिससे डिजिटल पढ़ाई में उसे भारी दिक्कत आ रही है।

  • मुलाकात पर पाबंदी: अनामिका ने यह भी आरोप लगाया कि उसने भोपाल में सीएम हाउस और विधानसभा जाकर मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने उसे मिलने नहीं दिया।

प्रशासन का पक्ष: “संस्थान बेहतर है, छात्र कर रहे प्रदर्शन”

दूसरी ओर, जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी इन आरोपों को अलग नजरिए से देख रहे हैं:

  • दावा: उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर नियमानुसार एक प्रतिष्ठित संस्थान में अनामिका का दाखिला कराया गया है, जहाँ देश भर के बच्चे पढ़ रहे हैं।

  • आर्थिक सहायता: उन्होंने स्पष्ट किया कि सीधे नकद राशि देने का कोई प्रावधान नहीं है, हालांकि छात्रा और उसके पिता को यात्रा भत्ता (TA) दिया गया है।

अनामिका की मांग: निजी संस्थान में मिले मौका

अनामिका अब सरकार और क्षेत्रीय विधायक से आर्थिक मदद की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि यदि उसे सही सहयोग मिले, तो वह भोपाल या इंदौर के किसी बेहतर निजी संस्थान में जाकर अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करना चाहती है।

मामले का सारांश 

  1. जनवरी 2026: सीधी के बहरी में सीएम के सामने रोते हुए मदद मांगी।

  2. फरवरी 2026: सीएम के निर्देश पर भोपाल के कोचिंग सेंटर में एडमिशन हुआ।

  3. मार्च 2026: जनसुनवाई में पहुँचकर सुविधाओं के अभाव और खराब खाने की शिकायत की।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें