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EXCLUSIVE: चंबल का वो ‘सुपरकॉप’ जिसने खत्म किया जगमोहन गैंग, 100 साल के हुए देश के पहले IPS बैच के आखिरी गवाह!

भोपाल। जब हम 100 साल के किसी व्यक्ति की कल्पना करते हैं, तो अक्सर एक कमजोर शरीर की तस्वीर उभरती है। लेकिन ...

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| सतना टाइम्स

भोपाल। जब हम 100 साल के किसी व्यक्ति की कल्पना करते हैं, तो अक्सर एक कमजोर शरीर की तस्वीर उभरती है। लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्व DGP हरिवल्लभ मोहनलाल जोशी अलग मिट्टी के बने हैं। 5 मार्च को अपना 100वां जन्मदिन मनाने जा रहे जोशी जी आज भी 1969 के उस एनकाउंटर की एक-एक गोली का हिसाब जुबानी सुनाते हैं। वे आजाद भारत के पहले IPS बैच (1948) के संभवतः आखिरी जीवित अधिकारी हैं।

Former DGP Harivallabh Joshi

1. जगमोहन गैंग का वो खूनी अंत

1969 में चंबल में जगमोहन तोमर और छोटा नत्थू जैसे डकैतों का खौफ था। जोशी जी याद करते हैं कि कैसे उन्होंने भिंड और मुरैना पुलिस के बीच के ‘ईगो’ और ‘कोऑर्डिनेशन की कमी’ को खत्म किया।

  • रणनीति: उन्होंने एक ऐसे मुखबिर को भरोसे में लिया जिसकी बहन से जगमोहन ने बदतमीजी की थी।

  • नतीजा: एक ही ऑपरेशन में जगमोहन समेत 17 डाकुओं का सफाया कर दिया गया।

2. छोटा नत्थू और कांस्टेबल आत्माराम की बहादुरी

जोशी जी की याददाश्त आज भी अचूक है। वे बताते हैं, “जब डकैत छोटा नत्थू ने अपनी SLR उठाई, ठीक उसी वक्त कांस्टेबल आत्माराम ने अपनी LMG (लाइट मशीन गन) से फायर झोंक दिया।” उन्होंने ही स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) को आधुनिक हथियारों से लैस किया और बीहड़ों की जानकारी के लिए सहरिया आदिवासियों को भर्ती किया।

3. लेक्चरर से ‘सुपरकॉप’ तक का सफर

  • जन्म: 5 मार्च 1926, किशनगढ़ रियासत (राजस्थान)।

  • शिक्षा: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई और नागपुर से इंग्लिश लिटरेचर में MA।

  • करियर: IPS बनने से पहले वे एक कॉलेज में लेक्चरर थे और पत्रकारिता (लोकमत) से भी जुड़े रहे।

  • सम्मान: बहादुरी के लिए उन्हें ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ और ‘विशिष्ट सेवा पदक’ से नवाजा गया।

4. 100 की उम्र में भी ‘कमांडिंग’ अंदाज

आज भी जोशी जी बिना किसी मदद के अपने पैरों पर चलते हैं। उनके गले में एक छोटी सी सीटी लटकी रहती है, जिसका इस्तेमाल वे घर में किसी को बुलाने के लिए करते हैं। उनकी आवाज में आज भी वही कड़कपन और अनुशासन है, जिसने कभी ग्वालियर रेंज के सात जिलों में कानून का राज स्थापित किया था।

प्रमुख उपलब्धियां

  1. ऐतिहासिक गवाह: 1948 के उस पहले बैच के सदस्य, जिसने ब्रिटिश ‘इंपीरियल पुलिस’ की जगह ली।

  2. रणनीतिकार: डकैत समस्या को खत्म करने के लिए ‘विलेज डिफेंस कमेटी’ को मजबूत किया।

  3. हथियारों का आधुनिकीकरण: पुलिस यूनिट्स को लाइट मशीन गन (LMG) जैसे आधुनिक हथियारों की मंजूरी दिलाई।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें