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MP में बिजली का ‘झटका’: 10.19% महंगी हो सकती है बिजली; सालाना ₹3600 तक बढ़ेगा बिल, पड़ोसी राज्यों से और पिछड़ जाएगा मध्य प्रदेश

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बुरी खबर के साथ हुई है। राज्य ...

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| सतना टाइम्स

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बुरी खबर के साथ हुई है। राज्य की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (पूर्व, पश्चिम और मध्य क्षेत्र डिस्कॉम) ने मिलकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.19% की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को सौंपा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो मध्य प्रदेश में बिजली की दरें पड़ोसी राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर पहुँच जाएंगी।

MP Electricity Rates

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (कंपनियों का तर्क)

बिजली कंपनियों ने आयोग को दी गई अपनी याचिका में ₹6,044 करोड़ के कुल राजस्व अंतर (घाटे) का दावा किया है। कंपनियों के अनुसार:

  • घाटे की स्थिति: मध्य क्षेत्र कंपनी करीब ₹18,712 करोड़, पूर्व क्षेत्र ₹16,378 करोड़ और पश्चिम क्षेत्र ₹7,285 करोड़ के घाटे में चल रही है।

  • राजस्व लक्ष्य: मौजूदा दरों पर कंपनियों को ₹59,331 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान है, जबकि खर्चों को पूरा करने के लिए ₹6,044 करोड़ की अतिरिक्त राशि की जरूरत है।

आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?

एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार जो महीने में लगभग 400 यूनिट बिजली खर्च करता है, उसके लिए गणित कुछ इस तरह होगा:

  • वर्तमान बिल: लगभग ₹3,250 प्रति माह।

  • प्रस्तावित बिल: लगभग ₹3,550 से ₹3,600 प्रति माह।

  • अतिरिक्त बोझ: ₹300-₹400 प्रति माह, यानी सालाना ₹3,600 से ₹4,800 का अतिरिक्त खर्चा।

पड़ोसी राज्यों से तुलना (400 यूनिट पर)

राज्य अनुमानित बिल (400 यूनिट)
मध्य प्रदेश (प्रस्तावित) ₹3,550 – ₹3,600
राजस्थान ₹3,000
छत्तीसगढ़ ₹2,200
गुजरात ₹2,100

आगे क्या होगा? (जनसुनवाई का शेड्यूल)

नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की याचिका स्वीकार कर ली है और अब गेंद जनता के पाले में है। आयोग ने 25 जनवरी 2026 तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद अलग-अलग शहरों में जनसुनवाई होगी:

  • जबलपुर: 24 फरवरी 2026

  • इंदौर: 25 फरवरी 2026

  • भोपाल: 26 फरवरी 2026

नोट: आयोग अक्सर कंपनियों द्वारा मांगी गई पूरी बढ़ोतरी को मंजूरी नहीं देता है, इसलिए अंतिम वृद्धि 10.19% से कम भी हो सकती है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें