भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हाड़ कंपा देने वाली ठंड से बचने की एक कोशिश जानलेवा साबित हुई। बिलखारिया थाना क्षेत्र के कोकता में एक 50 वर्षीय व्यक्ति की अपनी ही झोपड़ी में जिंदा जलने से मौत हो गई। घटना का कारण बिस्तर के पास अलाव जलाकर सोना बताया जा रहा है, जिसने रात के अंधेरे में विकराल आग का रूप ले लिया।
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हादसे की दर्दनाक दास्तां
मृतक की पहचान संतोष कुमार यादव (50 वर्ष) के रूप में हुई है। संतोष कोकता की एक झुग्गी में अकेले रहते थे और पड़ोसियों की मदद से अपना जीवन यापन कर रहे थे। शनिवार की रात जब भोपाल में पारा तेजी से गिरा, तो उन्होंने सर्दी से राहत पाने के लिए अपने बिस्तर के बिल्कुल करीब अलाव (आग) जलाया था।
चिंगारी बनी ‘मौत का फंदा’
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, संतोष गहरी नींद में थे और उन्हें अंदाजा भी नहीं लगा कि अलाव की एक चिंगारी कब उनके बिस्तर तक पहुँच गई।
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भीषण आग: आग ने पहले बिस्तर और फिर पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया।
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पड़ोसियों की कोशिश: जब तक आसपास के लोगों ने आग की लपटें देखीं और बुझाने के लिए दौड़े, तब तक संतोष पूरी तरह जल चुके थे। झोपड़ी के भीतर का मंजर इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई।
पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी
सूचना मिलते ही बिलखारिया थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक विशुद्ध हादसा है जो असावधानी के कारण हुआ।
सर्दी में ‘अलाव’ के इस्तेमाल को लेकर जरूरी सावधानी:
यह घटना एक बड़ा सबक है। ठंड के दिनों में सुरक्षित रहने के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
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बिस्तर से दूरी: कभी भी बिस्तर, पर्दे या ज्वलनशील कपड़ों के पास अलाव न जलाएं।
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बंद कमरा: बंद कमरे या तंग झोपड़ी में अलाव जलाकर कभी न सोएं, इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनने और आग लगने का दोहरा खतरा रहता है।
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सोने से पहले: सोने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आग पूरी तरह बुझ चुकी है।








