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सावधान! मामूली कील ने 19 साल के युवक को पहुँचाया वेंटीलेटर पर; टिटनेस का इंजेक्शन न लगवाना पड़ा भारी, शरीर बन गया ‘लकड़ी’

सतना (मध्य प्रदेश): अक्सर हम पैर में कांटा या कील चुभने को मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सतना जिला अस्पताल ...

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| सतना टाइम्स

सतना (मध्य प्रदेश): अक्सर हम पैर में कांटा या कील चुभने को मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सतना जिला अस्पताल के आईसीयू (ICU) से आई एक खबर आपको झकझोर देगी। यहाँ 19 साल का एक युवक, मुन्ना सिंह, पिछले 4 दिनों से वेंटीलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। वजह सिर्फ इतनी कि उसने कील चुभने के बाद समय पर टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगवाया।

Tetanus Infection Case

मैंगलौर में काम के दौरान हुई थी चूक

मुन्ना सिंह कर्नाटक के मैंगलौर में शटरिंग का काम करता था। काम के दौरान उसके पैर में जंग लगी दो कीलें गहराई तक चुभ गई थीं। मुन्ना ने घाव तो साफ किया, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगवाया। उसे लगा कि घाव भर जाएगा, लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि जंग लगी कील के साथ टिटनेस का घातक बैक्टीरिया उसके शरीर में प्रवेश कर चुका है।

जब बैक्टीरिया ने शुरू किया वार

करीब 7 दिन बाद टिटनेस के लक्षणों ने मुन्ना को जकड़ लिया:

  • लकड़ी जैसा शरीर: संक्रमण इतना घातक है कि मरीज का शरीर लकड़ी की तरह अकड़ गया है।

  • सेंसेटिव हालत: मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. बद्री विशाल सिंह के अनुसार, हल्की सी आहट या आवाज होने पर भी मरीज के शरीर में तेज ऐंठन (Spasms) होने लगती है।

  • जबड़ा बंद होना: टिटनेस में सबसे पहले जबड़ा लॉक होने लगता है, जिससे मरीज कुछ खा-पी या बोल नहीं पाता।

ICU में 4 दिन से जंग: 20 दिन की चुनौती

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत सतना जिला अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया।

  • उपचार: मुन्ना को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है और उसे संक्रमण रोकने के लिए ‘ह्यूमन टिटनेस इम्यूनोग्लोबुलिन’ जैसे महंगे इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।

  • स्थिति: वर्तमान में हालत स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उसे पूरी तरह ठीक होने में अभी कम से कम 20 दिन और लग सकते हैं।

डॉक्टरों की सलाह: कभी न बरतें ढिलाई

डॉ. बद्री विशाल सिंह ने आम जनता से अपील की है:

  1. चोट छोटी हो या बड़ी, जंग लगी चीज या गंदगी से लगने वाली चोट पर 24 घंटे के भीतर टिटनेस का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।

  2. टिटनेस का बैक्टीरिया धूल, मिट्टी और जंग में पाया जाता है।

  3. एक इंजेक्शन की कीमत महज चंद रुपये है, लेकिन न लगवाने पर इलाज में लाखों रुपये और जान का जोखिम होता है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें