मध्य प्रदेश के सागर जिले के 69 वर्षीय दामोदर अग्निहोत्री ने वह कर दिखाया, जो बड़े-बड़े संग्रहालय नहीं कर पाए। उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी के सामने उनके जीवन का वो खोया हुआ पन्ना खोल दिया, जिसे देख वे खुद अपनी पुरानी यादों के भंवर में खो गईं।

1962 से 1977 तक का दुर्लभ सफर
दामोदर जी पिछले 35 वर्षों से दुर्लभ चीजों का संग्रह कर रहे हैं। उनके पास हेमा मालिनी और धर्मेंद्र के सुनहरे दौर (1962-1977) की फिल्मों, निजी जीवन और अखबारों की कतरनों का ऐसा अनूठा संकलन है, जिसे देखकर खुद हेमा मालिनी भी दंग रह गईं।
ढाई साल की ‘हेमा’ को देख छलकीं आंखें
वृंदावन स्थित बंगले पर जब 70 व्यवस्थित बैनरों की प्रदर्शनी लगाई गई, तो अभिनेत्री भावुक हो उठीं:
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बचपन की यादें: संग्रह में हेमा मालिनी की ढाई साल की उम्र की अपनी मां और बहन के साथ वाली दुर्लभ फोटो और उनके तीसरे जन्मदिन की तस्वीर शामिल थी।
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धर्मेंद्र संग यादें: अपने पति धर्मेंद्र के साथ पुरानी तस्वीरों और फिल्मों के पोस्टर देखकर वे काफी देर तक उन्हें निहारती रहीं। उन्होंने अपने स्टाफ से इन तस्वीरों की फोटो लेने को भी कहा।
ड्रीम गर्ल’ ने खुद आगे बढ़कर किया सम्मान
हेमा मालिनी दामोदर जी के समर्पण से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने न केवल उनकी जमकर प्रशंसा की, बल्कि:
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विशेष ऑटोग्राफ: उन्होंने लिखा— “आपके द्वारा जो मेरी फिल्मों का कलेक्शन किया गया, वह बहुत अच्छा है। इसके लिए मैं धन्यवाद देती हूं।”
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सम्मान: अगले दिन उन्हें बंगले पर बुलाकर श्रीराधा-कृष्ण की प्रतिमा, साड़ी, मिठाई और नकद पारितोषिक देकर सम्मानित किया।
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मुंबई का न्यौता: उन्होंने दामोदर जी को मुंबई में होने वाले आगामी बड़े आयोजनों में इस प्रदर्शनी को प्रदर्शित करने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित करने का वादा किया है।
बुंदेली विरासत के रक्षक हैं दामोदर
सागर में ‘सत्यम कला एवं संस्कृति संग्रहालय’ के माध्यम से दामोदर अग्निहोत्री अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर बुंदेली विरासत और एंटिक्स को सहेजने का काम कर रहे हैं। हेमा-धर्मेंद्र का यह विशाल कलेक्शन उनके इसी जुनून का एक हिस्सा है, जिसने आज उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
संग्रह की खास बातें
| विवरण | जानकारी |
| संग्रहकर्ता | दामोदर अग्निहोत्री (सागर, मध्य प्रदेश) |
| कालखंड | वर्ष 1962 से 1977 तक का दुर्लभ संकलन। |
| खास तस्वीर | ढाई साल की उम्र की फोटो और तीसरे जन्मदिन की यादें। |
| सम्मान स्वरूप | नकद पारितोषिक, श्रीराधा-कृष्ण प्रतिमा और मुंबई का आमंत्रण। |








