सतना (मध्य प्रदेश):सतना जिले में धान खरीदी के अंतिम दौर में ‘सिकमी’ (बटाईदार) किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। साल भर पसीना बहाकर उगाई गई फसल जब सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंच पाई, तो मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने शहर के मुख्य सर्किट हाउस चौराहे पर डेरा डाल दिया। चक्काजाम कर रहे किसानों का एक ही नारा है— “हमारी फसल खरीदो या हमें मरने की अनुमति दो।”
![]()
600 किसानों का पंजीयन रद्द, पोर्टल बंद होने में महज 2 दिन
किसानों की इस नाराजगी की मुख्य वजह ‘खाद्य आपूर्ति विभाग’ द्वारा किया गया सत्यापन है।
-
समस्या: जिले के करीब 600 बटाईदार किसानों का पंजीयन ‘दस्तावेजों की कमी’ बताकर रद्द कर दिया गया है।
-
समय की कमी: धान खरीदी बंद होने में अब सिर्फ 2 दिन शेष हैं। जब तक पोर्टल पर सत्यापन नहीं होगा, किसान ‘स्लॉट बुक’ नहीं कर पाएंगे और उनकी फसल सरकारी दाम पर नहीं बिक पाएगी।
समर्थन मूल्य 2369 vs बाजार भाव 1000: आधी कीमत पर लूट
किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट आर्थिक बर्बादी का है।
-
सरकारी भाव: ₹2369 प्रति क्विंटल।
- बाजार का हाल: मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी इसी धान को मात्र ₹1000 से ₹1200 प्रति क्विंटल में मांग रहे हैं।
किसानों का कहना है कि व्यापारियों को फसल बेचने पर उनकी लागत भी नहीं निकलेगी, जिससे वे कर्ज के दलदल में फंस जाएंगे।
“गेंद भोपाल के पाले में”
मौके पर पहुंचे एसडीएम और पुलिस अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान पोर्टल खुलने तक हटने को तैयार नहीं हैं।
जिला आपूर्ति अधिकारी सम्यक जैन ने बताया, “यह समस्या जिला स्तर की नहीं है। 600 किसानों के सत्यापन का मामला भोपाल (राज्य मुख्यालय) स्तर पर लंबित है। शासन से निर्देश मिलते ही पोर्टल खोल दिया जाएगा।”
किसानों की दो टूक चेतावनी
प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कर दिया है कि वे कोरे आश्वासनों से नहीं मानेंगे। उनका कहना है कि अगर अगले 48 घंटों में उनकी धान नहीं खरीदी गई, तो उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली ने बटाईदार किसानों को सड़क पर रात बिताने को मजबूर कर दिया है।








