सीधी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रविवार के सीधी दौरे ने विंध्य क्षेत्र के प्रशासनिक गलियारों में कंपकंपी पैदा कर दी है। सर्किट हाउस के बंद कमरे में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद सीधी कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को पद से हटा दिया गया। इस पूरी कार्रवाई के पीछे की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जहाँ मुख्यमंत्री ने ‘ऑन द स्पॉट’ फैसले लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही की कोई जगह नहीं है।

न्यूज़ हेडलाइंस
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दो बार बुलावा, एक फैसला: बैठक के दौरान कलेक्टर को दो बार अंदर बुलाया गया, वहीं तय हो गई थी रवानगी।
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विधायकों का ‘शिकायत पत्र’: जनप्रतिनिधियों ने सीएम के सामने खोला अधिकारियों की मनमानी का कच्चा चिट्ठा।
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सख्त चेतावनी: “फील्ड में काम नहीं करना तो वल्लभ भवन (मंत्रालय) में बैठो” — सीएम का कड़ा प्रहार।
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बड़ी कार्रवाई: कलेक्टर हटाए गए, जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पीएस धनवाल तत्काल प्रभाव से निलंबित।
सर्किट हाउस की वो ‘सीक्रेट’ मीटिंग
मुख्यमंत्री पनवार हवाई अड्डे से सीधे सर्किट हाउस पहुँचे। यहाँ उन्होंने सबसे पहले जिले के सांसदों और विधायकों के साथ बंद कमरे में वन-टू-वन चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर भारी नाराजगी जताई।
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इनसाइड डिटेल: चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को दो बार मीटिंग रूम के अंदर बुलाया। उनसे कुछ फाइलों और शिकायतों पर जवाब मांगा गया, जिससे स्पष्ट हो गया था कि गाज गिरना तय है।
‘फील्ड नहीं तो मंत्रालय’ — सीएम का सख्त लहजा
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री का बेहद सख्त अंदाज देखने को मिला। उन्होंने जिले के आला अधिकारियों को दो टूक कहा कि जो अफसर जनता के बीच जाकर काम करने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें मैदानी पोस्टिंग की जरूरत नहीं है, वे मंत्रालय के गलियारों में जाकर बैठें।
“यह दौरा शिकायतों के आधार पर किया गया था। शासन की योजनाओं में लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।”
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
शाम ढलने से पहले ही जारी हुआ ‘फरमान’
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद ही मीडिया को संकेत दे दिए थे कि शाम तक परिणाम सामने आ जाएगा। हुआ भी वही; सीएम के भोपाल पहुँचने से पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टर को हटाने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही जिला सहकारी बैंक के जीएम पर निलंबन की गाज गिरी।
प्रशासनिक हलकों में दहशत
सीधी की इस कार्रवाई ने पूरे मध्य प्रदेश के कलेक्टरों और अधिकारियों के बीच एक कड़ा संदेश भेजा है। मुख्यमंत्री की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने यह साफ कर दिया है कि मोहन सरकार अब केवल फाइलों पर नहीं, बल्कि धरातल पर फीडबैक के आधार पर फैसले ले रही है।








