कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा से अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर एक भावुक और दूरदर्शी विदाई भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने न केवल अपने दशकों लंबे राजनीतिक सफर को याद किया, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का जिक्र कर अपने भविष्य के इरादों के संकेत भी दे दिए। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि राज्यसभा से कार्यकाल समाप्त होने का अर्थ उनकी सक्रिय राजनीति का अंत नहीं है।

फ्यूचर प्लान: 2028 की तैयारी?
भाषण के दौरान दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा:
“मैं न थका हूं, न सेवानिवृत्त हुआ हूं (न मैं टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं)। आगे चलकर हम और भी काम करेंगे।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए उन्होंने संकेत दिया है कि वे अब पूरा ध्यान मध्य प्रदेश पर केंद्रित करेंगे। माना जा रहा है कि वे वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से जमीनी स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करने की कमान संभाल सकते हैं।
वैचारिक दृढ़ता और “मनभेद” पर स्पष्टीकरण
दिग्विजय सिंह ने अपनी राजनीति के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
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विचारधारा से समझौता नहीं: उन्होंने जोर देकर कहा कि 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बनने से लेकर मुख्यमंत्री और सांसद बनने तक, उन्होंने कभी अपनी विचारधारा (Ideology) से समझौता नहीं किया।
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कटुता के लिए क्षमा: उन्होंने स्वीकार किया कि उनके भाषणों में कभी कटुता रही हो तो वे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने कहा, “मेरे मतभेद (Ideological differences) रहे हैं, लेकिन मैंने कभी मनभेद (Personal animosity) होने का अवसर नहीं दिया।”
लोकतंत्र और ‘संवाद’ की गिरती मर्यादा पर चिंता
अपने विदाई संदेश में उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती दूरी पर अपनी राय रखी:
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संवाद ही रास्ता: उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का जिक्र करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त चर्चा के बिल पारित करना लोकतंत्र की भावना के अनुकूल नहीं है। समाधान हमेशा ‘संवाद’ से ही निकलना चाहिए।
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सांप्रदायिक सौहार्द: उन्होंने देश में बढ़ती सांप्रदायिक कटुता पर चिंता जताते हुए इसे भारतीय संविधान और संस्कृति के विपरीत बताया।
कबीर की साखी से समापन
अपने राजनीतिक जीवन के सार को उन्होंने कबीरदास जी के एक दोहे से परिभाषित किया:
“कबीरा खड़ा बाज़ार में, सबकी मांगे खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।”
दिग्विजय सिंह का सफरनामा: एक नज़र
| उपलब्धि | विवरण |
| राजनीतिक शुरुआत | 22 वर्ष की आयु में नगर पालिका अध्यक्ष। |
| विधायक एवं मंत्री | 30 वर्ष में विधायक, 33 वर्ष में राज्य मंत्री। |
| मुख्यमंत्री | 40 वर्ष की आयु में मध्य प्रदेश के CM बने (10 साल तक पद पर रहे)। |
| राज्यसभा विदाई | 18 मार्च 2026 को कार्यकाल पूर्ण। |
| भविष्य का संकेत | मध्य प्रदेश की सक्रिय राजनीति में वापसी। |








