‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने हाल के हफ्तों में सोशल मीडिया कंपनियों को ‘ताबड़तोड़’ टेकडाउन ऑर्डर भेजे हैं। इसमें व्यंग्य, कार्टून और विपक्ष के AI जनरेटेड पोस्ट शामिल हैं।

क्या-क्या हटाया गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में उन पोस्ट्स को ‘विथहेल्ड’ (ब्लॉक) कर दिया गया है जिनमें:
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व्यंग्य और कार्टून: प्रधानमंत्री के भाषणों या संस्कृत श्लोक के उच्चारण पर किए गए कटाक्ष।
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राजनीतिक पोस्ट: कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी किए गए 9 AI-जनरेटेड पोस्ट और ‘द वायर’ के व्यंग्यात्मक वीडियो।
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विशिष्ट टिप्पणियां: सबीर भाटिया और अन्य यूजर द्वारा अल्पसंख्यकों या सरकारी नीतियों पर की गई आलोचनात्मक टिप्पणियां।
3 घंटे का सख्त नियम और IT एक्ट
कंटेंट हटाने की यह प्रक्रिया IT एक्ट की धारा 69A के तहत की जा रही है:
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समय सीमा: नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को सरकारी आदेश मिलने के महज 2 से 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना पड़ता है।
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गोपनीयता: ये आदेश अक्सर गोपनीय होते हैं, जिससे यह पता नहीं चल पाता कि पोस्ट हटाने का ठोस आधार क्या था।
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कंपनियों की मजबूरी: विशेषज्ञों का मानना है कि समय की कमी के कारण कंपनियां पोस्ट की वैधता की जांच किए बिना ही उन्हें ब्लॉक कर देती हैं ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
सिर्फ विपक्ष ही नहीं, दक्षिणपंथी अकाउंट्स पर भी कार्रवाई
हैरानी की बात यह है कि इस ‘डिजिटल कैंची’ की जद में कुछ सरकार समर्थक या हिंदू कार्यकर्ता अकाउंट्स भी आए हैं:
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सार्थक भगत: 2.7 लाख फॉलोअर्स वाले हिंदू कार्यकर्ता और @woke_kashmiri जैसे अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया गया है।
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वजह: ये अकाउंट्स हाल ही में ‘UGC रेगुलेशन 2026’ के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
आंकड़ों में बढ़ती सेंसरशिप
मेटा (Meta) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 की तुलना में 2025 की पहली छमाही में सरकार की ओर से कंटेंट हटाने के अनुरोधों में तीन गुना इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यह पारदर्शिता के खिलाफ है और इससे ऑनलाइन लोकतांत्रिक बहस की जगह कम हो रही है।
विवाद: एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
| प्लेटफॉर्म | X (Twitter) और Instagram |
| कानून | IT एक्ट की धारा 69A |
| नियम | आदेश के 3 घंटे के भीतर टेकडाउन अनिवार्य |
| प्रभाव | विपक्ष और कुछ सक्रिय दक्षिणपंथी अकाउंट्स पर ब्लॉक की कार्रवाई |








