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102 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हुए धारकुंडी वाले स्वामी सच्चिदानंद, मुंबई में ली अंतिम सांस,लाखों भक्तों की आंखें हुई नम

सतना: देशभर में सनातन परंपरा के ध्वजवाहक रहे, सतना जिले के प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज ने ...

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| सतना टाइम्स

सतना: देशभर में सनातन परंपरा के ध्वजवाहक रहे, सतना जिले के प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज ने नश्वर देह का त्याग कर दिया है। 102 वर्ष की दीर्घायु में उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही देशभर में फैले उनके लाखों अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई है।संत परंपरा के इस महान नक्षत्र ने मुंबई में उपचार के दौरान दोपहर करीब 12 बजे देह त्यागी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई के बदलापुर स्थित आश्रम ले जाया गया है।

सोमवार को धारकुंडी में होगी समाधि

आश्रम प्रबंधन के अनुसार, स्वामी जी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से शनिवार शाम तक सतना जिले के धारकुंडी आश्रम लाया जाएगा। सोमवार को वैदिक रीति-रिवाज और पूरे विधि-विधान के साथ उन्हें धारकुंडी आश्रम परिसर में समाधि दी जाएगी। इस मौके पर बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।

1956 में घने जंगलों में जलाया था ज्ञान का दीपक

स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी का जीवन तप और त्याग की मिसाल रहा।उन्होंने 22 नवंबर 1956 को अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद जी के आशीर्वाद से विंध्य के घने जंगलों के बीच धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उनका गुरुद्वारा चित्रकूट के सती अनसूया आश्रम में था। यहीं से उन्होंने आध्यात्मिक चेतना का प्रसार शुरू किया और धारकुंडी को सेवा और साधना का प्रमुख केंद्र बनाया।

4 माह पहले हुए थे अंतिम दर्शन

भक्तों को याद होगा कि लगभग चार माह पहले जब स्वामी जी चित्रकूट आए थे, तो उनके दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा था। उस दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। पिछले साल अपने 101वें जन्मदिन पर उन्होंने बदलापुर आश्रम से भक्तों को वर्चुअल दर्शन दिए थे।

सीएम मोहन यादव ने जताया दुख

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी जी के देवलोकगमन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि सतना के धारकुंडी आश्रम के संस्थापक, परम पूज्य स्वामी परमहंस श्री सच्चिदानंद जी महाराज के परलोक गमन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका संपूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवता के कल्याण को समर्पित रहा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल अनुयायियों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

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