भोपाल (मध्य प्रदेश):नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रविवार (18 जनवरी 2026) को एक बयान जारी कर बताया कि मध्य प्रदेश की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक हो चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासियों और दलितों के लंबे समय तक जेल में बंद रहने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।
![]()
प्रमुख आंकड़े: जेलों की वर्तमान स्थिति
सिंघार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश जेलों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है:
-
कुल कैदी: प्रदेश की 132 जेलों में वर्तमान में 45,543 कैदी बंद हैं।
-
राष्ट्रीय स्तर पर स्थान: कैदियों की इस संख्या के मामले में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।
-
अत्यधिक भीड़ (Overcrowding): राज्य की जेलों की क्षमता लगभग 30,000 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहाँ 152% अधिक कैदी रखे गए हैं।
आदिवासी और विचाराधीन कैदियों का दर्द
उमंग सिंघार ने बताया कि जेलों में बंद लोगों में एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जिनका अपराध अभी साबित नहीं हुआ है:
-
विचाराधीन कैदी (Undertrials): कुल 45,543 कैदियों में से लगभग 22,946 (करीब 50%) विचाराधीन हैं।
-
आदिवासी प्रतिनिधित्व: इन विचाराधीन कैदियों में 21% आदिवासी समुदाय से हैं।
-
सजायाफ्ता कैदी: दोषी ठहराए गए लगभग 22,000 कैदियों में से भी करीब 50% संख्या आदिवासी और दलितों की है।
अनुच्छेद 21 का हवाला और मुख्य मांगें
सिंघार ने कहा कि गरीबी और कानूनी जानकारी के अभाव में ये लोग जमानत नहीं जुटा पाते, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। उन्होंने सरकार और न्यायपालिका से निम्नलिखित मांगें की हैं:
-
शीघ्र सुनवाई: विचाराधीन कैदियों के मामलों का निपटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए जल्द हो।
-
सरल जमानत प्रक्रिया: गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए जमानत के नियमों में रियायत दी जाए।
-
जेल सुधार: जेलों की क्षमता बढ़ाने और वहां की अमानवीय स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाए जाएं।
MP जेल सांख्यिकी: एक नजर में
| विवरण | आंकड़े (उमंग सिंघार के अनुसार) |
| कुल चालू जेलें | 132-133 |
| कुल क्षमता | ~30,000 कैदी |
| वर्तमान कैदी | 45,543 |
| विचाराधीन आदिवासी कैदी | 21% |
| जेलों में भीड़ का प्रतिशत | 152% |
निष्कर्ष: उमंग सिंघार का यह बयान मध्य प्रदेश की न्यायिक और सामाजिक व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को रेखांकित करता है। जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होना न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह त्वरित न्याय की आवश्यकता पर भी बल देता है।








