छिंदवाड़ा (करेर)। छिंदवाड़ा-नागपुर हाईवे पर गुरुवार शाम हुए हृदय विदारक बस हादसे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली का अपना दौरा संक्षिप्त कर सीधे छिंदवाड़ा पहुंचे। वे हेलीकॉप्टर से उतरते ही सबसे पहले अस्पताल गए और फिर सीधे मोहखेड़ तहसील के करेर गांव पहुंचे, जहाँ एक साथ 10 अर्थियां उठने से पूरा गांव मातम में डूबा हुआ है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के बीच जमीन पर बैठकर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।

न्यूज़ हेडलाइंस
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त्वरित एक्शन: दिल्ली से सीधे छिंदवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री; घायलों और मृतकों के परिजनों से की मुलाकात।
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भावुक क्षण: करेर गांव में शोक संतप्त परिवारों के बीच बैठकर बांटी उनकी पीड़ा।
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इलाज की समीक्षा: अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से ली घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी; बेहतर उपचार के निर्देश।
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आर्थिक संबल: मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख और घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत।
अपनों को खोने का गम: “हर कदम पर साथ खड़ी है सरकार”
मुख्यमंत्री जब करेर गांव पहुंचे, तो वहां का माहौल अत्यंत गमगीन था।
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सीधा संवाद: डॉ. यादव ने उन परिवारों से बात की जिन्होंने इस हादसे में अपने मुखिया, महिलाओं या बच्चों को खो दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहायता राशि केवल एक शुरुआत है, सरकार इन परिवारों के पुनर्वास और भविष्य की जिम्मेदारी भी उठाएगी।
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अस्पताल में हाल-चाल: गांव जाने से पहले सीएम जिला अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने उन 41 घायलों से मुलाकात की जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उस बच्चे और महिला का हाल जाना जिनके हाथ इस भीषण टक्कर में कटकर अलग हो गए थे।
प्रभारी मंत्री और प्रशासन अलर्ट मोड पर
छिंदवाड़ा के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह हादसे के बाद से ही जिले में डेरा डाले हुए हैं।
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सतत मॉनिटरिंग: प्रभारी मंत्री लगातार अस्पताल की व्यवस्थाओं और घायलों को दी जा रही दवाओं व चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी कर रहे हैं।
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मुफ्त उपचार: मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सभी घायलों का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उन्हें एयर एम्बुलेंस से अन्य बड़े केंद्रों पर भी भेजा जाएगा।
हादसे का फ्लैशबैक: क्या हुआ था उस काली रात?
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तारीख और समय: गुरुवार शाम करीब 7 बजे, सिमरिया के पास।
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घटना: मुख्यमंत्री के सम्मेलन से लौट रही बस (MP28 P 0321) की एक मिनी ट्रक से सीधी भिड़ंत हो गई।
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बड़ी लापरवाही: जांच में सामने आया कि बस 28 महीने से अनफिट थी और उसका बीमा भी नहीं था।
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नुकसान: 10 लोगों की मौत (3 महिलाएं, 1 बच्चा शामिल) और 41 यात्री घायल।
“दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”
मुख्यमंत्री ने अनफिट बस के संचालन और उसे सरकारी कार्यक्रम में लगाए जाने की चूक पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने जिला प्रशासन और आरटीओ विभाग को इस लापरवाही की विस्तृत जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों व बस मालिक पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।








