छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा-नागपुर रोड पर बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे ने 10 परिवारों की खुशियां छीन लीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम से लौट रही एक बस (MP28 P 0321) पिकअप से भिड़ंत के बाद पलट गई। इस हादसे की पड़ताल में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं— जिस बस में 10 लोगों की जान गई, वह पिछले सवा दो साल से ‘अवैध’ रूप से सड़क पर दौड़ रही थी। सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस अनफिट बस को खुद जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भीड़ लाने-ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

न्यूज़ हेडलाइंस
-
भीषण त्रासदी: हादसे में 3 महिलाओं और 1 बच्चे समेत 10 लोगों की मौत, 41 यात्री घायल।
-
सिस्टम की लापरवाही: बस का फिटनेस नवंबर 2023 में खत्म हो चुका था, 2022 से बीमा भी नहीं था।
-
बदहवास परिजन: जिला अस्पताल में चीख-पुकार, एक ही गांव (करेर पंचायत) के थे सभी मृतक।
-
मुआवजे का एलान: मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख और गंभीर घायलों को 1-1 लाख की सहायता।
आरटीओ के रिकॉर्ड में ‘कबाड़’, सड़कों पर ‘किलर’
हादसे का शिकार हुई बस (MP28 P 0321) के दस्तावेजों की जांच में सिस्टम की बड़ी खामी उजागर हुई है:
-
फिटनेस: बस का फिटनेस सर्टिफिकेट नवंबर 2023 में ही एक्सपायर हो गया था। यानी पिछले 28 महीनों से बस तकनीकी रूप से सड़क पर चलने लायक नहीं थी।
-
बीमा: आरटीओ वेबसाइट के अनुसार, साल 2022 के बाद से बस का बीमा (Insurance) भी रिन्यू नहीं कराया गया था।
-
प्रशासनिक चूक: सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन और आरटीओ ने बिना कागजात चेक किए इस बस को ‘वीआईपी’ कार्यक्रम की ड्यूटी में कैसे लगा दिया?
हादसे का मंजर: “ओवरटेक के चक्कर में उड़े परखच्चे”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान हुआ। बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि पिकअप से टकराने के बाद बस के परखच्चे उड़ गए।
-
दिल दहला देने वाला दृश्य: हादसे में एक बच्चे और एक महिला का हाथ कटकर शरीर से अलग हो गया।
-
एक ही गांव में मातम: बस में सवार सभी यात्री मोहखेड़ ब्लॉक की करेर पंचायत के निवासी थे। जैसे ही खबर गांव पहुँची, पूरा इलाका अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा।
मुख्यमंत्री के निर्देश और सहायता
सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ (ट्विटर) पर शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं:
-
निःशुल्क इलाज: सभी घायलों का इलाज सरकारी खर्च पर किया जाएगा। जबलपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम छिंदवाड़ा और नागपुर भेजी जा रही है।
-
कंट्रोल रूम: भोपाल में स्वास्थ्य विभाग में एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो घायलों के उपचार की सतत मॉनिटरिंग कर रहा है।
जिम्मेदार कौन?
इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
-
क्या आरटीओ केवल आम जनता के चालान काटने के लिए है?
-
सरकारी कार्यक्रमों में बसों के अधिग्रहण के समय फिटनेस सर्टिफिकेट की जांच क्यों नहीं की गई?
-
28 महीने तक बिना कागजात के सड़क पर दौड़ रही बस पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?








